भारत की आज़ादी के 78 वर्षों बाद भी एक गांव ऐसा था, जहाँ पहली बार बिजली पहुँची है।
छत्तीसगढ़ के सुकमा ज़िले का गोगुन्दा, जहाँ कभी नक्सलियों की गोलियों की गूंज सुनाई देती थी, आज विकास की रोशनी से जगमगा रहा है।
जहाँ सूरज ढलते ही अंधेरा छा जाता था, वहाँ पहली बार बल्ब जला है।
और उसके साथ जली है उम्मीद — बदलाव की, भरोसे की और नए भारत की।

