जर्नलिस्ट अमरदीप चौहान/शब्दमेल समाचार समूह छत्तीसगढ़।
घरघोड़ा/रायगढ़।
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ियों का उद्देश्य 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को बेहतर पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक शिक्षा उपलब्ध कराना है। लेकिन रायगढ़ जिले के छैडोरिया गांव में संचालित एक आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति इन दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
आरोप है कि आंगनबाड़ी परिसर में लगे हैंडपंप से निकलने वाला पानी अत्यधिक आयरनयुक्त और दूषित है, जिसके कारण वहां आने वाले मासूम बच्चों और महिलाओं को मजबूरी में असुरक्षित पानी पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी में इतनी तेज दुर्गंध है कि उसका उपयोग करना भी मुश्किल है। ऐसे पानी के लगातार सेवन से बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
- जर्नलिस्ट अमरदीप चौहान/शब्दमेल समाचार समूह छत्तीसगढ़।
- जांच के बिना नहीं पता चलेगी असली स्थिति ग्रामीणों के अनुसार पानी में केवल आयरन ही नहीं, बल्कि अन्य हानिकारक तत्व भी हो सकते हैं। इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही संभव है। बावजूद इसके, अब तक पानी की गुणवत्ता की जांच और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। दो विभागों पर उठे सवाल
जांच के बिना नहीं पता चलेगी असली स्थिति
ग्रामीणों के अनुसार पानी में केवल आयरन ही नहीं, बल्कि अन्य हानिकारक तत्व भी हो सकते हैं। इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही संभव है। बावजूद इसके, अब तक पानी की गुणवत्ता की जांच और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
दो विभागों पर उठे सवाल
ग्रामीणों के अनुसार पानी में केवल आयरन ही नहीं, बल्कि अन्य हानिकारक तत्व भी हो सकते हैं। इसकी पुष्टि वैज्ञानिक जांच के बाद ही संभव है। बावजूद इसके, अब तक पानी की गुणवत्ता की जांच और वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
दो विभागों पर उठे सवाल
पेयजल की गुणवत्ता की निगरानी की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) और जल जीवन मिशन की है, जबकि आंगनबाड़ी का संचालन महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन होता है। ऐसे में दोनों विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर विभागीय उदासीनता समझ से परे है।
ग्रामीणों ने की शुद्ध पेयजल की मांग
ग्रामीणों का दावा है कि क्षेत्र के कई गांवों में हैंडपंप और बोरवेल के पानी में आयरन सहित अन्य अवांछित तत्वों की समस्या है, जबकि पारंपरिक कुओं का पानी अपेक्षाकृत बेहतर और उपयोग योग्य पाया जाता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से आंगनबाड़ी केंद्र में तत्काल शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने तथा पानी की गुणवत्ता की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
बड़ा सवाल
जब आंगनबाड़ियों को बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य का केंद्र माना जाता है, तो फिर उन्हीं केंद्रों में मासूमों को दूषित पानी पीने के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है? क्या जिम्मेदार विभाग बच्चों की सेहत को लेकर गंभीर हैं या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है?
ग्रामीणों ने मामले की तत्काल जांच कर सुरक्षित पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

