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छह सप्ताह की गिरावट के बाद शेयर बाजार में तेजी, Sensex 564 अंक उछला; Nifty 23,400 के पार

Shabdmail News
Last updated: September 21, 2026 2:37 pm
Shabdmail News
Published: September 21, 2026
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मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 21 सितंबर 2026 को लगातार छह सप्ताह की गिरावट के बाद राहत की तेजी देखने को मिली। बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और विदेशी निवेशकों की वापसी ने प्रमुख सूचकांकों को मजबूती दी। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेशकों की चिंता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

Contents
  • छह सप्ताह की गिरावट के बाद लौटी खरीदारी
  • कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार को राहत
  • विदेशी निवेशकों की वापसी से भी मिला सहारा
  • बैंकिंग और बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी
  • 12 प्रमुख सेक्टरों में तेजी
  • पश्चिम एशिया का तनाव अब भी बड़ी चुनौती
  • वैश्विक ब्याज दरों पर भी नजर
  • NSE IPO और बाजार में पूंजी प्रवाह
  • आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?
  • निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत
    • निष्कर्ष

सोमवार के कारोबार के अंत में BSE Sensex 564.03 अंक यानी 0.76 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,858.99 अंक पर बंद हुआ। वहीं NSE Nifty 67.90 अंक यानी 0.29 प्रतिशत चढ़कर 23,414.30 अंक पर पहुंच गया। बाजार में यह तेजी ऐसे समय आई है जब पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार ने लगातार छठी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की थी। Reuters के अनुसार यह गिरावट का सिलसिला वर्ष 2020 के बाद सबसे लंबा रहा।

छह सप्ताह की गिरावट के बाद लौटी खरीदारी

पिछले कुछ सप्ताह से भारतीय बाजार पर कई बाहरी और घरेलू कारकों का दबाव था। खासतौर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, पश्चिम एशिया का तनाव, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ब्याज दरों को लेकर चिंता ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया।

पिछले सप्ताह के अंत तक Nifty और Sensex लगातार छह सप्ताह नीचे रहे। Nifty में साप्ताहिक आधार पर करीब 0.22 प्रतिशत और Sensex में 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में सोमवार को बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी देखने को मिली। बाजार विश्लेषकों ने इसे हालिया गिरावट के बाद ब bargain buying और short covering से जुड़ा बताया है।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार को राहत

सोमवार की तेजी में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट की भी अहम भूमिका रही। Brent crude करीब 2.25 प्रतिशत गिरकर लगभग 101.5 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। तेल की कीमतों में यह नरमी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि महंगा कच्चा तेल आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकता है।

Reuters की रिपोर्ट के अनुसार Brent crude में गिरावट के पीछे सऊदी अरब से तेल आपूर्ति में सुधार की उम्मीद और पश्चिम एशिया में कूटनीतिक गतिविधियों से जुड़ी उम्मीदें भी थीं। हालांकि क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है और किसी नए घटनाक्रम से तेल की कीमतें दोबारा बढ़ सकती हैं।

विदेशी निवेशकों की वापसी से भी मिला सहारा

भारतीय शेयर बाजार के लिए एक और सकारात्मक संकेत विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी FII की खरीदारी रही। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक सात लगातार कारोबारी सत्रों में बिकवाली के बाद शुक्रवार को भारतीय शेयरों में शुद्ध खरीदार बने और करीब 599 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी DII ने भी बाजार को समर्थन दिया और उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की। घरेलू निवेशकों की यह खरीदारी बाजार में तरलता और समर्थन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

बैंकिंग और बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी

सोमवार की तेजी में कई बड़े और भारी वजन वाले शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। HDFC Bank और ICICI Bank दोनों में लगभग 0.6 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। बड़ी कंपनियों के शेयरों में खरीदारी बढ़ने से प्रमुख सूचकांकों को मजबूती मिली।

इसके अलावा Indian Hotels के शेयर में लगभग 1.7 प्रतिशत की तेजी रही। वहीं Welspun Corp में करीब 3.9 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। Welspun Corp की एक इकाई को Saudi Aramco से लगभग 209 मिलियन डॉलर का ऑर्डर मिलने की खबर का असर शेयर पर दिखाई दिया।

12 प्रमुख सेक्टरों में तेजी

बाजार की व्यापक तस्वीर देखें तो सोमवार को 16 प्रमुख सेक्टरों में से 12 सेक्टरों में बढ़त दर्ज हुई। हालांकि छोटे और मिडकैप शेयरों में प्रमुख सूचकांकों जैसी मजबूती नहीं दिखाई दी और कुछ हिस्सों में दबाव बना रहा। इससे संकेत मिलता है कि सोमवार की तेजी मुख्य रूप से बड़ी कंपनियों के शेयरों से संचालित रही।

निवेशकों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आने वाले कारोबारी सत्रों में कितनी टिकाऊ रहती है। पिछले छह सप्ताह की लगातार गिरावट के बाद केवल एक दिन की तेजी को बाजार की दिशा में स्थायी बदलाव के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।

पश्चिम एशिया का तनाव अब भी बड़ी चुनौती

भारतीय शेयर बाजार के सामने सबसे बड़ी बाहरी चुनौतियों में पश्चिम एशिया का तनाव शामिल है। क्षेत्र में किसी भी नए सैन्य या राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों पर पड़ सकता है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर देश के व्यापार घाटे, रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है। सितंबर में जब Brent crude 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर गया था, तब भारतीय शेयर बाजार पर इसका दबाव भी देखने को मिला था।

वैश्विक ब्याज दरों पर भी नजर

वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों का रुख भी भारतीय शेयर बाजार के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा और आगे ब्याज दरों में संभावित बदलाव को लेकर बाजार में अनिश्चितता है। ऊंची वैश्विक ब्याज दरें विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों को अधिक आकर्षक बना सकती हैं, जिससे उभरते बाजारों में पूंजी प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

इसी कारण आने वाले दिनों में विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, डॉलर की दिशा और कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगे।

NSE IPO और बाजार में पूंजी प्रवाह

भारतीय बाजार में NSE के 2.3 अरब डॉलर के IPO को लेकर भी निवेशकों की दिलचस्पी रही है। IPO पूरी तरह सब्सक्राइब हो चुका है। बड़े IPO में पूंजी के जाने से बाजार में उपलब्ध तरलता पर कुछ समय के लिए असर पड़ सकता है, लेकिन दूसरी ओर सफल IPO गतिविधि घरेलू पूंजी बाजार में निवेशकों की रुचि को भी दर्शाती है।

आगे कैसी रह सकती है बाजार की चाल?

सोमवार की तेजी के बाद बाजार के लिए अगला महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या Nifty हाल की कमजोरी से उबरते हुए आगे बढ़ता है या फिर ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली शुरू होती है। बाजार विश्लेषकों की तकनीकी टिप्पणियों में Nifty के लिए 23,400 के आसपास का स्तर महत्वपूर्ण बताया गया है, जबकि 23,200 के आसपास निकट समर्थन की बात कही गई है।

हालांकि तकनीकी स्तर बाजार की संभावित चाल को समझने का एक तरीका हैं और भविष्य के प्रदर्शन की गारंटी नहीं देते। निवेशकों के लिए वैश्विक घटनाक्रम, कंपनियों के नतीजे, तेल की कीमत और विदेशी निवेश के आंकड़े भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत

सोमवार की तेजी से निवेशकों को छह सप्ताह की गिरावट के बाद कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन बाजार में जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं और पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। ऐसे में बाजार में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

निष्कर्ष

21 सितंबर 2026 का कारोबारी सत्र भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत लेकर आया। छह सप्ताह की लगातार गिरावट के बाद Sensex में 564 अंक से अधिक और Nifty में करीब 68 अंकों की बढ़त दर्ज हुई। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेशकों की खरीदारी, घरेलू संस्थागत निवेश और निचले स्तरों पर खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी।

फिर भी निवेशकों के सामने पश्चिम एशिया का तनाव, तेल की कीमतें, वैश्विक ब्याज दरें और विदेशी पूंजी का प्रवाह जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। इसलिए सोमवार की तेजी को बाजार की हालिया कमजोरी के बीच एक सकारात्मक कारोबारी सत्र के रूप में देखा जा सकता है, जबकि आने वाले सत्रों में बाजार की दिशा इन प्रमुख आर्थिक और वैश्विक संकेतकों पर निर्भर करेगी।

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