नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है
नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक जलमार्गों में सुरक्षा और नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना दुनिया की प्राथमिकता होनी चाहिए। हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई टेलीफोनिक बातचीत में प्रधानमंत्री ने इस समुद्री गलियारे को ‘खुला और सुरक्षित’ रखने पर जोर दिया है।
1. “नौवहन की स्वतंत्रता से समझौता अस्वीकार्य”
प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन और सोशल मीडिया (X) के माध्यम से यह संदेश दिया है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और आवाजाही में रुकावट पूरी तरह से ‘अस्वीकार्य’ है। उन्होंने वैश्विक नेताओं के साथ इस बात पर सहमति जताई कि समुद्री सुरक्षा न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए जीवन रेखा के समान है।
2. भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव
भारत के लिए यह मुद्दा बेहद संवेदनशील है क्योंकि:
LPG आयात: भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% LPG इसी मार्ग से आयात करता है।
कच्चा तेल: भारत के कच्चे तेल और उर्वरक की आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है।
प्रधानमंत्री ने देश को आश्वस्त किया है कि सरकार पेट्रोल, डीजल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, ताकि आम आदमी पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
3. ‘संवाद और कूटनीति’ ही एकमात्र समाधान
प्रधानमंत्री का रुख स्पष्ट है—युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है। उन्होंने बार-बार दोहराया है कि “संवाद और कूटनीति” ही इस तनाव को कम करने का एकमात्र रास्ता है। भारत अपनी ‘मानवता प्रथम’ की नीति के तहत सभी पक्षों से संयम बरतने और बातचीत की मेज पर आने की अपील कर रहा है।
4. भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
हॉर्मुज और आसपास के खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक कार्यरत हैं। इसके अलावा, कई व्यापारिक जहाजों पर भारतीय चालक दल (Crew members) तैनात हैं। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय मिशन 24×7 अलर्ट पर हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
निष्कर्ष: प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय राजनयिक भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत अब केवल एक मूकदर्शक नहीं, बल्कि वैश्विक संकटों में एक ‘विश्व बंधु’ की भूमिका निभा रहा है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शांति बहाल करना केवल व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय और वैश्विक सुरक्षा का प्रश्न है।

