भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2025 और 2026 के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के बैंकों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अप्रैल 2026 की ताजा मौद्रिक नीति और हालिया नोटिफिकेशन के आधार पर मुख्य बदलाव नीचे दिए गए हैं:
1. बैंक बोर्ड और गवर्नेंस में सुधार (अप्रैल 2026)
RBI गवर्नर ने 8 अप्रैल 2026 को बैंकों के कामकाज के तरीकों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है:
पॉलिसी पर ध्यान: अब बैंकों के बोर्ड का मुख्य काम नीति निर्धारण (Policy Oversight) होगा। उन्हें बैंक के रोजमर्रा के ऑपरेशन्स (Day-to-day operations) में दखल देने के बजाय रणनीति और सुपरविजन पर ध्यान देना होगा।
जवाबदेही: यह कदम निजी बैंकों (जैसे HDFC, ICICI) में गवर्नेंस को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए उठाया गया है।
2. डिजिटल सुरक्षा और ऑथेंटिकेशन (1 अप्रैल 2026 से प्रभावी)
डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के लिए RBI ने सख्त नियम लागू किए हैं:
अनिवार्य 2-Factor Authentication: UPI, डेबिट/क्रेडिट कार्ड और डिजिटल वॉलेट के जरिए होने वाले लेन-देन के लिए अब ‘टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन’ अनिवार्य कर दिया गया है।
रिस्क-आधारित निगरानी: अगर आप किसी नए डिवाइस से या बहुत बड़ी राशि का ट्रांजैक्शन करते हैं, तो बैंक आपसे अतिरिक्त वेरिफिकेशन मांगेंगे। नियमित और छोटे ट्रांजैक्शन पहले की तरह आसानी से हो सकेंगे।
बैंक की जिम्मेदारी: धोखाधड़ी या सिस्टम फेलियर होने पर अब बैंकों की जवाबदेही तय की गई है।
3. लोन और ब्याज दरें (अक्टूबर 2025 से प्रभावी बदलाव)
ब्याज दर रीसेट (Floating Rate): पर्सनल लोन के मामले में, जब ब्याज दरों में बदलाव होता है, तो बैंकों को ग्राहकों को फिक्स्ड रेट (Fixed Rate) पर स्विच करने का विकल्प देना अनिवार्य होगा।
कस्टमर रिटेंशन: बैंक अब किसी ग्राहक को अपने पास बनाए रखने के लिए 3 साल से पहले भी लोन के स्प्रेड कंपोनेंट्स (Spread Components) को कम कर सकते हैं, बशर्ते यह भेदभाव रहित हो।
4. खाता संचालन और मिनिमम बैलेंस
निष्क्रिय खाते: 1 जनवरी 2026 से, यदि खाता लंबे समय से निष्क्रिय है या केवाईसी (KYC) अपडेट नहीं है, तो उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
जीरो बैलेंस सुविधाएं: 1 अप्रैल 2026 से बेसिक सेविंग खातों (BSBD) के लिए कैश डिपॉजिट पर लगने वाले कुछ शुल्कों और एटीएम मेंटेनेंस चार्ज में राहत देने की बात कही गई है।
5. वित्तीय बाजार और MSME के लिए राहत
MSME ऑनबोर्डिंग: बैंकों के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर MSMEs को जोड़ने के लिए ड्यू-डिलिजेंस (Due diligence) की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है ताकि छोटे व्यवसायों को जल्दी कर्ज मिल सके।
कैपिटल मार्केट एक्सपोजर: बैंकों द्वारा कंपनियों के अधिग्रहण (Acquisition) के लिए दिए जाने वाले लोन की नई गाइडलाइंस अब 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 2025 और 2026 के लिए निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों के बैंकों के लिए कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश
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