सुबोध कुमार वर्मा
प्रकृति सिर्फ आपसे भाव चाहती है उसे आपके पद प्रतिष्ठा धन यश वैभव से कोई सरोकार नही है इसलिए प्रकृति की सेवा के काम स्वेच्छा से किये जाने चाहिए। यह जीवन अनमोल है इसको बचाने के लिए सभी को खुद ही प्रयास करना होगा। कोई भी सत्ता प्रकृति के प्रकोप से मनुष्य को नही बचा सकती यह बात सभी को समझनी होगी-

आज अपने पूज्य गुरुदेव विश्वविख्यात पर्यावरणविद् और चिपको आन्दोलन के प्रणेता पद्मविभूषित श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी की पुण्यतिथि के अवसर पर देहरादून जाते समय प्रख्यात पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सुबोध कुमार वर्मा ने अपनी सहधर्मिणी राष्ट्रीय शिक्षक सम्मान तथा भारत रत्न गौरव सम्मान से सम्मानित प्राथमिक विद्यालय हाफिजाबाद द्वितीय की प्रधानाचार्या/पीस पार्टिसिपेंट एनसीईआरटी नई दिल्ली श्रीमती अंजलि वर्मा तथा अपनी सुपुत्री इन्दु वर्मा के साथ नजीबाबाद में दाना-पानी प्रतिष्ठान के स्वामी सुशील कुमार के आग्रह पर परिसर में पीपल का पौधा लगाकर अपने पूज्य गुरुदेव को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा समस्त विश्व और मानवजाति के लिए कल्याणकारी प्रार्थना की। इस अवसर पर श्री सुबोध कुमार वर्मा ने बताया कि प्रत्येक बर्ष पूज्य गुरुदेव श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रकृति और मानवजाति की रक्षा और राष्ट्र के निर्माण में योगदान करने वाली विभूतियों को हिमालय प्रहरी सम्मान से सम्मानित किया जाता है। इस बार देश के वरिष्ठ पत्रकार श्री कमर वहीद नकवी समाज संस्कृति निसर्ग और माध्यम विषय पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हैं। कार्यक्रम में इस बार भूदान आन्दोलनकारी श्रीमती कमला पाठक तथा चिपको आन्दोलनकारी दयाल भाई को हिमालय प्रहरी सम्मान 2026 से सम्मानित किया जाएगा। विभिन्न आन्दोलनों से जुड़े हुए देश विदेश के महानुभावों के साथ साथ चन्द्र सिंह पूर्व आईएएस जैसे वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी पर्यावरण कार्यकर्ता उपस्थित रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव श्री सुन्दर लाल बहुगुणा जी ने जीवनपर्यंत निःस्वार्थ भाव से हिमालय नदियों और प्रकृति और मानवजाति की सेवा की है उन्होंने वर्तमान की सभी समस्याओं के समाधान का एकमात्र उपाय वृक्षों की खेती बताया है। वृक्षों की खेती से ही जल जंगल और ज़मीन के साथ सभी प्राणियों के जीवन को समृद्धि प्रदान की जा सकती है। मनुष्य के लालच से उपजी पर्यावरण तथा जलवायु परिवर्तन की समस्या ने गम्भीर रूप ले लिया है अब इस समस्या का स्थायी समाधान तो केवल प्रकृति के पास है मनुष्य बुद्धिमान प्राणी है इसलिए निःस्वार्थ भाव से प्रयास करेगा तो अल्प समय के लिए खतरों को थोड़ा कम किया जा सकता है। लेकिन यह तभी सम्भव है जब धरती को वृक्षों से लवालव कर दिया जाये। पूज्य गुरुदेव ने सरकार और जनसामान्य के बीच तथ्यों के आधार पर बड़े बांधों से होने वाले ख़तरों को बताया था आगाह किया था। पूज्य गुरुदेव की सोच व्यापक थी और दृष्टि दूरगामी उनकी दूर दृष्टि का अनुमान आज इसी बात से लगाया जा सकता है कि पश्चिम के विकसित देशों ने बड़े बांधों को बहुआयामी संकटों का कारण मानते हुए उन्हें निरस्त कर दिया है और अब उन्हें क्रमबद्ध तरीके से धराशायी करते हुए नदियों की अविरलता को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। पूज्य गुरुदेव श्री सुन्दर लाल बहुगुणा जी के पास समस्या नाम की कोई चीज नहीं थी उनके पास केवल समाधान होता था। उन्होंने हमेशा सतत विकास की पैरोकारी की ऐसे विकास का हमेशा विरोध किया जिससे अमीर और अधिक अमीर बने और गरीब और भी अधिक गरीब हो जाये। स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप ऐसा विकास हो जिससे प्रकृति का नुक़सान न हो वह सुरक्षित रहे। नदियों की पवित्रता को बनाये रखने के लिये उन्होंने एक मंत्र दिया था कि नदियों के प्रवाह को मत रोको। गंगा को अविरल बहने दो, गंगा को निर्मल रहने दो। लेकिन एक तरफ नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को रोका जा रहा है और वहीं दूसरी ओर नदियों के पुनरूद्धार के लिए सरकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। सैकड़ों साल पुराने पेड़ों और जंगलों को उजाड़कर पौधारोपण की दुहाई दी जा रही है। प्रकृति के साथ खिलवाड़ अब मनुष्य जाति के लिये हितकर नहीं है। आज विकास की अंधी दौड़ में घने जंगलों को उजाड़कर मनुष्य ने अपने लिये बड़ा खतरा मोल ले लिया है। क्योंकि पेड़ मनुष्य और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में मदद करते हैं। वर्तमान समय में जल जंगल और ज़मीन की सुरक्षा अनिवार्य है। समाज में इनके प्रति संवेदनशीलता जरूरी है। प्रकृति के काम तो सेवा और समर्पित भाव के साथ किये जाने चाहिए केवल औपचारिकता निभाने के लिए यह कार्य करना सही नही है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य का दायित्व है कि वह स्वेच्छा से पौधारोपण करके उनकी सुरक्षा करें। प्रकृति सिर्फ आपसे भाव चाहती है उसे आपके पद प्रतिष्ठा धन यश वैभव से कोई सरोकार नही है इसलिए प्रकृति की सेवा के काम स्वेच्छा से किये जाने चाहिए। यह जीवन अनमोल है इसको बचाने के लिए सभी को खुद ही प्रयास करना होगा। कोई भी सत्ता प्रकृति के प्रकोप से मनुष्य को नही बचा सकती यह बात सभी को समझनी होगी।
सुबोध कुमार वर्मा पर्यावरणविद् सामाजिक कार्यकर्ता सहयोगी विश्वविख्यात पर्यावरणविद् और चिपको आन्दोलन के प्रणेता पद्मविभूषित पूज्य गुरुदेव श्री सुन्दर लाल बहुगुणा जी।


