भोपाल/इंदौर। मध्य प्रदेश में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी UPI से जुड़े प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर व्यापारिक संगठनों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। इंदौर में विभिन्न व्यापारी संगठनों ने 23 सितंबर 2026 को “No UPI Day” मनाने का ऐलान किया है। इस दिन विरोध में शामिल व्यापारी UPI के माध्यम से भुगतान स्वीकार नहीं करने तथा कई स्थानों पर QR कोड और UPI भुगतान उपकरणों को काले कपड़े से ढकने की तैयारी कर रहे हैं।
- 23 सितंबर को क्या होगा?
- UPI शुल्क को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
- व्यापारियों की क्या मांग है?
- भोपाल में भी विरोध की तैयारी
- जबलपुर में भी उठा मुद्दा
- सरकार और व्यापारियों के तर्क अलग-अलग
- आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ सकता है?
- पेट्रोल पंपों को लेकर अलग मामला
- डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर व्यापक बहस
- 23 सितंबर पर रहेगी नजर
व्यापारियों का कहना है कि प्रस्तावित MDR व्यवस्था से विशेष रूप से अधिक मूल्य वाले कारोबारी UPI लेन-देन की लागत बढ़ सकती है। दूसरी ओर, सरकारी पक्ष से जुड़े स्पष्टीकरणों में कहा गया है कि लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेन-देन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। ऐसे में इस पूरे मुद्दे को लेकर व्यापारी संगठनों और नीति-निर्माताओं के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं।
23 सितंबर को क्या होगा?
इंदौर में 23 सितंबर को प्रस्तावित “No UPI Day” के दौरान बड़ी संख्या में व्यापारी UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने की तैयारी में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, 125 से अधिक व्यापारिक संगठनों ने इस अभियान को समर्थन दिया है और इसमें लगभग दो लाख व्यापारियों की भागीदारी का दावा किया गया है। कई बाजारों में QR स्कैनर और UPI साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर विरोध दर्ज कराने की योजना है।
इंदौर के प्रमुख बाजारों और व्यापारिक क्षेत्रों से जुड़े संगठनों के इस अभियान में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें कपड़ा बाजार, सराफा, सियागंज सहित विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों से जुड़े संगठन बताए गए हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि उनका उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को समाप्त करना नहीं, बल्कि प्रस्तावित अतिरिक्त लागत के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज कराना है।
UPI शुल्क को लेकर क्यों हो रहा है विरोध?
विरोध का मुख्य मुद्दा Merchant Discount Rate यानी MDR है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में 15 अक्टूबर 2026 से कुछ Person-to-Merchant UPI लेन-देन पर ₹2,000 से अधिक की राशि के लिए 0.4 प्रतिशत MDR लागू किया जाना है। ₹2,000 तक के पात्र लेन-देन को इससे अलग रखा गया है। रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि प्रस्तावित शुल्क व्यापारी की ओर से वहन किया जाएगा, इसे ग्राहक से अलग UPI शुल्क के रूप में लेने की व्यवस्था नहीं बताई गई है।
व्यापारी संगठनों की चिंता यह है कि कम मार्जिन वाले कारोबार में यदि डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की लागत बढ़ती है तो इसका सीधा असर उनकी लागत और लाभ पर पड़ सकता है। कुछ व्यापारिक प्रतिनिधियों ने यह आशंका भी जताई है कि अतिरिक्त लागत के कारण कुछ कारोबारी बड़े मूल्य के डिजिटल लेन-देन के बजाय नकद भुगतान को प्राथमिकता दे सकते हैं।
व्यापारियों की क्या मांग है?
व्यापारी संगठनों की प्रमुख मांग प्रस्तावित MDR व्यवस्था को वापस लेने या उसमें बदलाव करने की है। इंदौर के व्यापारिक संगठनों ने इस मुद्दे को आगे केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय तक पहुंचाने की तैयारी की है। इसके लिए ज्ञापन और प्रतिनिधिमंडल के माध्यम से अपनी आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही गई है।
व्यापारियों का तर्क है कि पिछले कई वर्षों में UPI ने देश में डिजिटल भुगतान को तेजी से बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में व्यापारिक लेन-देन पर अतिरिक्त लागत लागू होने से छोटे और मध्यम कारोबारियों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, प्रस्तावित व्यवस्था का असर सभी UPI लेन-देन पर समान नहीं होगा।
भोपाल में भी विरोध की तैयारी
इंदौर के साथ-साथ भोपाल में भी व्यापारी संगठन इस मुद्दे पर सक्रिय हैं। रिपोर्टों के अनुसार, भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने प्रस्तावित MDR के खिलाफ बैठक करने और राज्य तथा केंद्र सरकार को ज्ञापन देने की तैयारी की है। इससे संकेत मिलता है कि UPI शुल्क का मुद्दा केवल इंदौर तक सीमित नहीं रह गया है।
मध्य प्रदेश के अन्य शहरों के व्यापारिक संगठनों तक भी अभियान पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। WhatsApp समूहों, व्यापारिक संगठनों के नेटवर्क और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापारियों को अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। इंदौर के आयोजकों ने प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर भागीदारी का लक्ष्य रखा है।
जबलपुर में भी उठा मुद्दा
UPI शुल्क को लेकर जबलपुर में भी विरोध प्रदर्शन की खबर सामने आई है। स्थानीय जनसंगठनों ने UPI भुगतान पर प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था के विरोध में प्रदर्शन किया और 23 सितंबर को “No UPI Day” के समर्थन की घोषणा की। प्रदर्शनकारियों ने इस व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग करते हुए ज्ञापन भी दिया।
इससे यह मुद्दा व्यापारिक संगठनों के साथ-साथ कुछ उपभोक्ता और सामाजिक संगठनों के बीच भी चर्चा का विषय बनता दिखाई दे रहा है।
सरकार और व्यापारियों के तर्क अलग-अलग
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग पक्ष सामने आ रहे हैं। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि अतिरिक्त MDR से कारोबार की लागत बढ़ सकती है। वहीं उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सरकारी पक्ष का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था का प्रभाव सभी मर्चेंट UPI लेन-देन पर नहीं पड़ेगा और करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट लेन-देन प्रभावित नहीं होंगे। Person-to-Person UPI भुगतान भी इस बदलाव से अलग बताए गए हैं।
इसलिए 23 सितंबर का “No UPI Day” केवल एक दिन के भुगतान बहिष्कार तक सीमित नहीं माना जा रहा है। व्यापारिक संगठनों की नजर इसके माध्यम से सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने और प्रस्तावित शुल्क व्यवस्था पर पुनर्विचार कराने पर है।
आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि बड़ी संख्या में दुकानें 23 सितंबर को UPI भुगतान स्वीकार नहीं करती हैं तो ग्राहकों को खरीदारी के लिए नकद या उपलब्ध अन्य भुगतान विकल्प रखने की आवश्यकता पड़ सकती है। हालांकि यह विरोध सभी दुकानों पर लागू होगा या केवल अभियान में शामिल व्यापारियों तक सीमित रहेगा, यह स्थानीय स्तर पर संबंधित व्यापारिक संगठनों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
ग्राहकों के लिए यह भी समझना जरूरी है कि “No UPI Day” का अर्थ देशभर में UPI सेवा बंद होना नहीं है। यह व्यापारिक संगठनों द्वारा घोषित एक विरोध अभियान है। इसलिए किसी दुकान पर UPI उपलब्ध रहेगा या नहीं, यह उस व्यापारी के अभियान में शामिल होने पर निर्भर करेगा।
पेट्रोल पंपों को लेकर अलग मामला
UPI शुल्क विवाद के बीच पेट्रोल पंपों से संबंधित कुछ संदेश सोशल मीडिया पर भी प्रसारित हुए हैं। यहां सावधानी जरूरी है। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) ने एक वायरल दावे को गलत और भ्रामक बताया है, जिसमें मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंपों पर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान को बंद करने की बात कही गई थी। इसलिए पेट्रोल पंपों से जुड़े किसी भी वायरल संदेश को आधिकारिक जानकारी से सत्यापित करना जरूरी है।
दूसरी ओर, अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप डीलरों द्वारा प्रस्तावित MDR को लेकर अपने स्तर पर विरोध और ₹2,000 से अधिक के ईंधन भुगतान पर UPI सीमित करने की योजना की खबरें भी प्रकाशित हुई हैं। इस विषय में तारीख और लागू होने वाली व्यवस्था को लेकर अलग रिपोर्टें हैं, इसलिए ग्राहकों को स्थानीय पेट्रोल पंप और संबंधित डीलर संगठन से जानकारी लेना उचित होगा।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर व्यापक बहस
भारत में UPI पिछले वर्षों में रोजमर्रा के भुगतान का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक QR कोड और UPI साउंड बॉक्स सामान्य रूप से दिखाई देते हैं। ऐसे में व्यापारिक भुगतान पर MDR को लेकर उठी बहस का संबंध केवल व्यापारियों की लागत से नहीं, बल्कि डिजिटल भुगतान की भविष्य की दिशा से भी है।
व्यापारी संगठन चाहते हैं कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था में ऐसी लागत न हो जिससे छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़े। दूसरी ओर, प्रस्तावित MDR व्यवस्था के समर्थक पक्ष का तर्क है कि इसके प्रभाव को सभी UPI लेन-देन पर लागू मानना सही नहीं होगा, क्योंकि प्रस्तावित बदलाव कुछ निर्धारित मर्चेंट लेन-देन पर केंद्रित है।
23 सितंबर पर रहेगी नजर
अब सबसे अधिक नजर 23 सितंबर 2026 पर रहेगी। इस दिन इंदौर सहित अन्य स्थानों पर कितने व्यापारी अभियान में शामिल होते हैं, कितने बाजारों में UPI भुगतान प्रभावित होता है और ग्राहकों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है, यह महत्वपूर्ण होगा।
व्यापारी संगठन अपने अभियान को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। इंदौर में 125 से अधिक व्यापारिक संगठनों की भागीदारी और प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर व्यापारियों को जोड़ने का लक्ष्य इस मुद्दे को मध्य प्रदेश में व्यापक चर्चा का विषय बना चुका है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश में “No UPI Day” का अभियान प्रस्तावित UPI MDR व्यवस्था के खिलाफ व्यापारिक संगठनों की आपत्ति का एक प्रमुख रूप बनकर सामने आया है। इंदौर में 23 सितंबर को विरोध की तैयारी सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है, जबकि भोपाल, जबलपुर और अन्य क्षेत्रों में भी इस मुद्दे पर गतिविधियां सामने आई हैं।
आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 23 सितंबर को UPI पूरी तरह बंद होने की घोषणा नहीं है। बल्कि अभियान में शामिल कुछ व्यापारी UPI भुगतान स्वीकार नहीं करने का निर्णय ले सकते हैं। इसलिए उस दिन खरीदारी या अन्य व्यापारिक लेन-देन करने वाले ग्राहकों को वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था रखने की जरूरत पड़ सकती है।
आने वाले दिनों में व्यापारिक संगठनों की मांग, सरकार की प्रतिक्रिया और प्रस्तावित MDR व्यवस्था में किसी बदलाव को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

