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कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा का बहुमत, 55 वार्डों में जीत; EVM गड़बड़ी से कुछ नतीजे अटके

Shabdmail News
Last updated: September 15, 2026 4:45 pm
Shabdmail News
Published: September 15, 2026
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कांग्रेस को 40 वार्डों में जीत, निर्दलीयों ने भी दर्ज कराई मौजूदगी; 16 सितंबर को प्रभावित बूथों पर पुनर्मतदान, 17 सितंबर को होगी मतगणना

कोटा, 15 सितंबर 2026। राजस्थान के कोटा नगर निगम चुनाव परिणाम ने शहर की सियासत की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। 100 वार्डों वाले कोटा नगर निगम में भारतीय जनता पार्टी ने 55 वार्डों में जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि कांग्रेस को 40 वार्डों में जीत मिली है और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। हालांकि कुछ वार्डों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में तकनीकी खराबी के कारण चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह अंतिम रूप नहीं ले सकी है। प्रभावित मतदान केंद्रों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान और उसके बाद 17 सितंबर को मतगणना कराई जाएगी।

Contents
    • कांग्रेस को 40 वार्डों में जीत, निर्दलीयों ने भी दर्ज कराई मौजूदगी; 16 सितंबर को प्रभावित बूथों पर पुनर्मतदान, 17 सितंबर को होगी मतगणना
  • भाजपा ने पार किया बहुमत का आंकड़ा
  • EVM खराबी से परिणामों पर असमंजस
  • वार्ड 87 में कांग्रेस प्रत्याशी का प्रदर्शन
  • कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती
  • निर्दलीयों ने भी दिखाई ताकत
  • लगातार जीतने वाले प्रत्याशी भी चर्चा में
  • राजस्थान की शहरी राजनीति पर असर
  • अब नजर बोर्ड गठन पर
  • चुनाव परिणाम का संदेश
  • निष्कर्ष
    •  

कोटा का यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह केवल नगर निगम की सत्ता का सवाल नहीं है, बल्कि राजस्थान की शहरी राजनीति में दोनों प्रमुख दलों की संगठनात्मक ताकत का भी संकेत माना जा रहा है। भाजपा के बहुमत हासिल करने के बाद नगर निगम में बोर्ड बनाने की उसकी स्थिति मजबूत हो गई है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए परिणाम आत्ममंथन का विषय बन गए हैं।

भाजपा ने पार किया बहुमत का आंकड़ा

कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 51 वार्डों की आवश्यकता होती है। भाजपा ने 55 वार्डों में जीत हासिल कर बहुमत के आंकड़े को पार कर लिया। इस तरह भाजपा को नगर निगम में बोर्ड बनाने के लिए आवश्यक समर्थन के लिहाज से स्पष्ट बढ़त मिल गई है।

भाजपा की इस जीत को पार्टी के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर संगठन की सक्रियता, प्रत्याशियों का चुनाव, चुनाव प्रचार और पार्टी के बड़े नेताओं की सक्रियता को भी इस प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है।

वहीं कांग्रेस ने भी कई वार्डों में मजबूत मुकाबला किया और 40 वार्डों में जीत दर्ज की। इससे साफ है कि कोटा में मुकाबला एकतरफा नहीं रहा, बल्कि कई क्षेत्रों में कांग्रेस प्रत्याशियों ने भाजपा को कड़ी चुनौती दी।

EVM खराबी से परिणामों पर असमंजस

चुनाव परिणाम के बीच सबसे ज्यादा चर्चा EVM में तकनीकी खराबी को लेकर है। कोटा नगर निगम के वार्ड 11, 44 और 87 में EVM से संबंधित तकनीकी समस्या सामने आई, जिसके कारण इन वार्डों की प्रक्रिया को तत्काल अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इसके अलावा सुकेत नगरपालिका के एक मतदान केंद्र पर भी EVM संबंधी समस्या की जानकारी सामने आई है।

निर्वाचन अधिकारियों ने प्रभावित मशीनों को सुरक्षित रखवाया और मामले की रिपोर्ट निर्वाचन आयोग को भेजी। इसके बाद प्रभावित मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान कराने का कार्यक्रम तय किया गया है।

निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार 16 सितंबर को पुनर्मतदान कराया जाएगा और 17 सितंबर को वोटों की गिनती होगी। इसके बाद संबंधित नतीजों को अंतिम रूप दिया जाएगा।

वार्ड 87 में कांग्रेस प्रत्याशी का प्रदर्शन

वार्ड 87 का मामला विशेष रूप से चर्चा में रहा। यहां कांग्रेस प्रत्याशी लक्ष्मी शर्मा ने परिणाम को लेकर आपत्ति जताई और मतगणना केंद्र के बाहर धरना दिया। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।

कांग्रेस नेताओं ने निर्वाचन अधिकारियों से मशीन की स्थिति स्पष्ट करने और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करने की मांग की। बाद में कांग्रेस की ओर से भी मतगणना केंद्र पर पहुंचकर पारदर्शिता की मांग की गई। अधिकारियों की मौजूदगी में संबंधित मशीन को सुरक्षित किया गया।

हालांकि, चुनाव अधिकारियों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार अब प्रभावित मतदान केंद्र पर पुनर्मतदान कराया जाना है। इसलिए अंतिम परिणाम के लिए निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।

कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती

कोटा नगर निगम में भाजपा के बहुमत के बाद कांग्रेस के सामने अब अपने संगठन को मजबूत करने की चुनौती होगी। पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर प्रत्याशी चयन, वार्ड संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे।

कुछ वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों की जीत यह भी बताती है कि पार्टी का आधार पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कई क्षेत्रों में कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया है और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित किया है।

स्थानीय निकाय चुनाव में उम्मीदवारों का व्यक्तिगत जनसंपर्क, वार्ड की समस्याएं और स्थानीय मुद्दे अक्सर पार्टी के नाम से अधिक प्रभाव डालते हैं। इसलिए इन परिणामों को केवल राज्य स्तर की राजनीति के चश्मे से देखना पूरी तस्वीर नहीं बताएगा।

निर्दलीयों ने भी दिखाई ताकत

कोटा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। उपलब्ध परिणामों के अनुसार निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई वार्डों में जीत दर्ज की। राजस्थान के व्यापक शहरी निकाय चुनावों में भी निर्दलीय उम्मीदवारों ने उल्लेखनीय संख्या में वार्ड जीते हैं।

निर्दलीय पार्षद भविष्य में नगर निगम की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि कोटा में भाजपा ने बहुमत हासिल कर लिया है, इसलिए बोर्ड गठन के लिए उसे निर्दलीयों पर निर्भर रहने की स्थिति नहीं है।

लगातार जीतने वाले प्रत्याशी भी चर्चा में

कोटा चुनाव में कुछ प्रत्याशियों ने लगातार जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पकड़ का प्रदर्शन किया। रिपोर्टों के अनुसार भाजपा के विवेक राजवंशी ने वार्ड 54 से लगातार चौथी बार जीत दर्ज की और कांग्रेस प्रत्याशी को 2,226 मतों के अंतर से हराया। वहीं भाजपा के गोपाल राम मांडा ने भी लगातार पांचवीं जीत हासिल की।

दूसरी ओर कुछ वार्डों में कांग्रेस ने भाजपा के अनुभवी नेताओं को भी चुनौती दी। उदाहरण के तौर पर वार्ड 86 में कांग्रेस के अर्पित जैन ने भाजपा के पूर्व उप महापौर योगेंद्र खींची को 250 मतों से हराया। इससे पता चलता है कि कई वार्डों में स्थानीय समीकरणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

राजस्थान की शहरी राजनीति पर असर

कोटा नगर निगम का परिणाम राजस्थान के व्यापक शहरी निकाय चुनावों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। राज्य के 309 शहरी निकायों में हुए चुनावों में भाजपा ने बड़ी संख्या में वार्डों पर जीत दर्ज की है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार भाजपा ने 4,179 वार्ड, कांग्रेस ने 3,613 और निर्दलीयों ने 2,273 वार्ड जीते हैं। कुछ स्थानों पर EVM संबंधी तकनीकी समस्याओं के कारण पुनर्मतदान की प्रक्रिया भी चल रही है।

कोटा में भाजपा की जीत को इसी व्यापक शहरी चुनावी तस्वीर के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।

अब नजर बोर्ड गठन पर

कोटा नगर निगम में भाजपा के बहुमत के बाद अब सभी की नजर बोर्ड गठन और सभापति-उपसभापति के चुनाव पर है। हालांकि प्रभावित वार्डों में पुनर्मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा।

रिपोर्टों के अनुसार EVM विवाद के कारण कोटा और सुकेत में सभापति तथा उपसभापति पद से जुड़ी प्रक्रिया को भी प्रभावित किया गया है। अंतिम परिणाम के बाद ही आगे की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट होगी।

चुनाव परिणाम का संदेश

कोटा नगर निगम चुनाव परिणाम से भाजपा को स्थानीय स्तर पर बड़ी राजनीतिक बढ़त मिली है। 55 वार्डों में जीत पार्टी के लिए स्पष्ट बहुमत का संकेत है। वहीं कांग्रेस के 40 वार्डों में जीत हासिल करना यह बताता है कि पार्टी अभी भी शहर के कई हिस्सों में प्रभाव रखती है।

निर्दलीय उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी भविष्य की नगर निगम राजनीति में महत्वपूर्ण हो सकता है। अब जनता की नजर इस बात पर होगी कि चुनाव के दौरान किए गए वादों को नई नगर निगम व्यवस्था कितनी तेजी से पूरा करती है।

कोटा जैसे बड़े शहर में सड़क, सफाई, पेयजल, सीवरेज, यातायात, पार्किंग, कचरा प्रबंधन और शहरी विकास प्रमुख मुद्दे हैं। नई नगर निगम व्यवस्था के सामने इन समस्याओं के समाधान की बड़ी जिम्मेदारी होगी।

निष्कर्ष

कोटा नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 55 वार्ड जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस को 40 वार्डों में सफलता मिली है और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई वार्डों में जीत दर्ज की है। हालांकि EVM में तकनीकी खराबी के कारण कुछ वार्डों की चुनावी प्रक्रिया अभी पूरी तरह अंतिम नहीं हुई है। प्रभावित बूथों पर 16 सितंबर को पुनर्मतदान और 17 सितंबर को मतगणना प्रस्तावित है।

इस चुनाव परिणाम ने कोटा की स्थानीय राजनीति में भाजपा की स्थिति मजबूत कर दी है। अब असली परीक्षा नगर निगम में विकास कार्यों को गति देने और जनता की स्थानीय समस्याओं के समाधान की होगी। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई परिषद शहर के विकास के लिए किस तरह की प्राथमिकताएं तय करती है।

 

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