वीरान पड़े खंडहरों में आज भी आत्माएं भटकती हैं
शहर की भीड़भाड़ से दूर, घने जंगलों के बीच एक पुरानी रियासत के खंडहर आज भी मौजूद हैं। लोग इसे ‘खूनी बुर्ज’ कहते हैं। कहा जाता है कि सालों पहले यहाँ का राजा बेहद क्रूर था, जिसने अपने ही महल में कई बेगुनाहों को कैद कर रखा था। एक रात, एक रहस्यमयी आग लगी और पूरा महल राख हो गया, लेकिन वह बुर्ज आज भी खड़ा है।
कहानी की शुरुआत: तीन दोस्त—आर्यन, समीर और कबीर—साहस दिखाने के लिए एक रात उस खंडहर में रुकने का फैसला करते हैं। रात के 12 बज रहे थे। चारों तरफ सन्नाटा था, सिर्फ सूखी पत्तियों के सरसराहट की आवाज़ आ रही थी।
जैसे ही वे मुख्य दरवाजे से अंदर घुसे, उन्हें महसूस हुआ कि हवा अचानक ठंडी हो गई है। आर्यन ने मज़ाक में कहा, “लगता है राजा साहब हमारा स्वागत कर रहे हैं!” लेकिन समीर और कबीर के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं।
खौफनाक मोड़: अचानक, ऊपर के बुर्ज से किसी के ज़ोर-ज़ोर से हंसने की आवाज़ आई। वह हंसी इंसान की नहीं लग रही थी—वह बहुत भारी और गूँजती हुई थी। कबीर ने टॉर्च ऊपर की ओर घुमाई, तो उसे एक परछाईं खिड़की से गुज़रती दिखी।
वे भागना चाहते थे, लेकिन मुख्य दरवाजा अपने आप बंद हो गया। अब उनके पास ऊपर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। जैसे-जैसे वे सीढ़ियाँ चढ़ रहे थे, दीवारों पर खून के ताज़ा धब्बे दिखने लगे। ऐसा लग रहा था जैसे कोई उन्हें बुला रहा हो।
चरम सीमा (The Climax): जब वे सबसे ऊपरी कमरे में पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वहाँ एक पुरानी कुर्सी रखी थी, जो अपने आप हिल रही थी। कमरे के कोने में एक बूढ़ा आदमी बैठा था, जिसकी आँखों की जगह सिर्फ अंधेरा था। उसने धीरे से कहा, “तुम बहुत देर से आए… मेहमानों का इंतज़ार सदियों से हो रहा है।”
तभी टॉर्च की रोशनी में उन्होंने देखा कि दीवारों पर लगी तस्वीरें हिल रही थीं। देखते ही देखते वे तस्वीरें उन तीनों की शक्ल में बदल गईं! आर्यन चिल्लाया, “ये हम हैं!”
इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, कमरे की मशालें अपने आप जल उठीं और उन्हें अहसास हुआ कि वे उस कमरे में अकेले नहीं थे—सैकड़ों परछाइयाँ उन्हें घेर रही थीं।
अंजाम: अगली सुबह, गाँव वालों को खंडहर के बाहर सिर्फ तीन टॉर्च मिलीं, जो अभी भी जल रही थीं। वे तीनों दोस्त कहाँ गए, किसी को नहीं पता। आज भी रात के वक्त उस बुर्ज से तीन लड़कों के चिल्लाने की आवाज़ें आती हैं, जो शायद आज भी उस राजा के कैद में हैं।

