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यात्रा

पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है मध्यप्रदेश की सांची के स्तूप

Shabdmail News
Last updated: April 26, 2026 8:38 am
Shabdmail News
Published: April 26, 2026
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वर्षों से सांची का स्तूप दुनिया भर के पर्यटकों का आकर्षण का केन्द्र बिन्दु रहा है यहां समूची दुनिया से पर्यटक घूमने आते हैं।

सांची मध्यप्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है यहां ( सांची) पहुंचने के लिये विदेशी पर्यटक हवाई जहाज से भोपाल हवाई अड्डा से ट्रेन का या बस के माध्यम से आसानी से पहुंचा जा सकता है यहां के पर्यटकों को रूकने के लिए श्री लंका सरकार द्वारा रिसोर्ट बनाएं जिसका सम्पूर्ण प्रबंधन श्री लंका सरकार अपने अधीन रखती है। जो आने वाले पर्यटकों का अच्छा खासा ध्यान रखती है
सांची स्तूप के संग्रहालय में आदिकाल में उपयोग किए गए हथियार से लेकर रोजमर्रना वस्तुएं तक आकर्षण का केन्द्र हैं

Contents
  • वर्षों से सांची का स्तूप दुनिया भर के पर्यटकों का आकर्षण का केन्द्र बिन्दु रहा है यहां समूची दुनिया से पर्यटक घूमने आते हैं।
    • हेल्प डेस्क और शब्द मेल समाचार की संयुक्त पर्यटन यात्रा रिपोर्ट

करीब दो हजार साल पहले की बात है। सम्राट अशोक ने कलिंग के युद्ध में विजय तो प्राप्त कर ली थी, लेकिन उस युद्ध में हुए रक्तपात ने उनके मन को अशांत कर दिया था। वे रात भर सो नहीं पाते थे। उनके कानों में चीखें गूंजती थीं।

एक रात, अशोक ने एक अजीब सपना देखा। सपने में उन्होंने एक विशाल, अर्धवृत्ताकार सफेद टीला देखा, जिससे अद्भुत प्रकाश निकल रहा था। उस प्रकाश के स्पर्श मात्र से उनके मन का सारा बोझ और दुख गायब हो गया। सुबह उठते ही सम्राट ने तय किया कि वे शांति के इसी प्रतीक की खोज करेंगे।

विदिशा की यात्रा और देवी से मिलन अपनी यात्रा के दौरान अशोक विदिशा(वर्तमान विदिशा, मध्य प्रदेश) पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात देवी से हुई, जो एक व्यापारी की पुत्री थीं और बौद्ध धर्म की अनुयायी थीं। देवी ने अशोक को भगवान बुद्ध की शिक्षाओं के बारे में बताया—करुणा, अहिंसा और प्रेम।

अशोक को समझ आया कि उनके सपने का वह चमकता हुआ टीला वास्तव में बुद्ध के अवशेषों पर बना एक स्तूप था, जो शांति का प्रतीक है। उन्होंने उसी समय सांची की पहाड़ी को चुना, जो विदिसा के पास एक शांत और ऊँचा स्थान था।

स्तूप का निर्माण सम्राट अशोक ने सांची की पहाड़ी पर उस विशाल ईंटों के स्तूप का निर्माण शुरू करवाया। उन्होंने आदेश दिया कि इस स्तूप में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष रखे जाएं ताकि आने वाली पीढ़ियां इसे देखकर शांति का मार्ग चुन सकें।

सालों बाद, उनके पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा इसी सांची के स्तूप के पास से बुद्ध का संदेश लेकर श्रीलंका की ओर रवाना हुए थे। समय के साथ, शुंग और सातवाहन राजाओं ने इस स्तूप के चारों ओर सुंदर नक्काशीदार द्वार (तोरण) बनवाए, जिनमें बुद्ध के जीवन की कहानियाँ उकेरी गईं।

आज का सांची सदियों तक यह स्तूप जंगलों में छिपा रहा, लेकिन आज यह पूरी दुनिया के लिए शांति का केंद्र है। सांची का स्तूप हमें यह सिखाता है कि चाहे युद्ध कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में जीत केवल शांति और प्रेम की ही होती है।

अगर आप छुट्टीयों में कहीं घूमने का प्लान बना रहे हैं तो विश्व प्रसिद्ध सांची अवश्य यहां आपको रोचक तथ्य समझने का सबसे बेहतर अवसर मिलेगा
साथ ही हमारे इतिहास को करीब से देखने का मौका मिलेगा

हेल्प डेस्क और शब्द मेल समाचार की संयुक्त पर्यटन यात्रा रिपोर्ट


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