शब्द मेल न्युज़ के माध्यम से हम आपको बता रहे हैं वर्ल्ड हेरिटेज पर्यटन स्थल भोपाल मध्यप्रदेश से मात्र 45-50 किलोमीटर दूर स्थित भीम बेठिका के बारे में जो एक विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है यहां पहुंचने के लिए भोपाल हवाई यात्रा या रेल मार्ग द्वारा भोपाल पहुंचकर तत्पश्चात रेंट वाहन या बस सेवा द्वारा भीमबेटका पहुंचा जा सकता है भीमबेटका और उसका संपूर्ण इतिहास यह रहा
भीमबेटका का पूरा इतिहास

भीमबेटका (Bhimbetka) भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्रागैतिहासिक स्थलों में से एक है। यह मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में स्थित है और भोपाल से लगभग 45 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में विंध्य पर्वतमाला की तलहटी में स्थित है। यहां मानव सभ्यता के सबसे प्राचीन प्रमाण मिले हैं, जिनमें हजारों वर्ष पुराने शैलाश्रय (Rock Shelters) और शैलचित्र शामिल हैं।

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नाम की उत्पत्ति
“भीमबेटका” नाम महाभारत के पांडव भीम से जुड़ा माना जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार वनवास के दौरान भीम यहां विश्राम करते थे। “भीम-बैठका” अर्थात “भीम के बैठने का स्थान” समय के साथ भीमबेटका कहलाने लगा
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खोज कैसे हुई?
वर्ष 1957 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद् विष्णु श्रीधर वाकणकर रेल यात्रा के दौरान इस क्षेत्र से गुजर रहे थे। उन्होंने यहां की चट्टानों को देखकर यूरोप के प्रागैतिहासिक स्थलों जैसी समानता महसूस की। बाद में उन्होंने यहां सर्वेक्षण कराया और शैलचित्रों से युक्त गुफाओं की खोज की। यह खोज भारतीय पुरातत्व के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक मानी जाती है।
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प्राचीनता
भीमबेटका में 750 से अधिक शैलाश्रय पाए गए हैं, जिनमें से लगभग 400 में चित्रकारी मौजूद है। पुरातत्वविदों के अनुसार यहां मानव निवास के प्रमाण 1 लाख वर्ष से भी अधिक पुराने हो सकते हैं। यह स्थल पुरापाषाण, मध्यपाषाण और ऐतिहासिक काल तक मानव गतिविधियों का केंद्र रहा।
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शैलचित्रों की विशेषता
भीमबेटका की गुफाओं में बने चित्र लाल, सफेद, पीले और हरे रंगों से बनाए गए हैं। इन चित्रों में दर्शाया गया है—
शिकार करते हुए लोग
नृत्य और उत्सव
हाथी, बाघ, हिरण, बाइसन आदि पशु
युद्ध के दृश्य
घुड़सवारी
दैनिक जीवन की गतिविधियां
ये चित्र मानव सभ्यता के विकास और उस समय के सामाजिक जीवन की झलक प्रस्तुत करते हैं।
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राष्ट्रीय महत्व का स्थल
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने अगस्त 1990 में भीमबेटका को राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया। इसके बाद यहां संरक्षण और पर्यटन विकास के कार्य तेज हुए।
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यूनेस्को विश्व धरोहर
वर्ष 2003 में UNESCO ने भीमबेटका शैलाश्रयों को विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) घोषित किया। यूनेस्को ने इसे मानव और प्रकृति के हजारों वर्षों के संबंध तथा उत्कृष्ट शैलकला के कारण विश्व धरोहर सूची में शामिल किया।
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पर्यटन महत्व
आज भीमबेटका मध्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। यहां प्रतिवर्ष देश-विदेश से हजारों पर्यटक, इतिहासकार और शोधकर्ता आते हैं। यह स्थल भारतीय उपमहाद्वीप में मानव जीवन के सबसे प्राचीन साक्ष्यों में से एक माना जाता है।
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महत्वपूर्ण तथ्य
स्थान: भीमबेटका
भोपाल से दूरी: लगभग 45 किमी
खोज: 1957
राष्ट्रीय महत्व का स्मारक: 1990
यूनेस्को विश्व धरोहर: 2003
शैलाश्रय: 750+
चित्रयुक्त गुफाएं: लगभग 400
मानव निवास के प्रमाण: 1 लाख वर्ष से अधिक पुराने माने जाते हैं।
यह स्थल भारत के प्रागैतिहासिक इतिहास की ऐसी जीवित धरोहर है, जो हमें हजारों वर्ष पुराने मानव जीवन, कला और संस्कृति से परिचित कराती है।

