प्रदेश का गौरव-किंग ऑफ मैंगो नूरजहाँ आम /न्यूज़ सोर्स डिजिटल हेल्प डेस्क
पूरे क्षेत्र की पहचान बन गया। श्री जादव के अनुसार उनके पिता ने ग्राफ्टिंग तकनीक से एक विशेष पौधा तैयार किया था, जिसकी वर्तमान आयु लगभग 20 से 25 वर्ष है। इसके अतिरिक्त स्वयं श्री भरतराजसिंह जादव द्वारा तैयार किए गए 11 ग्राफ्टेड पौधे आज 3 से 5 वर्ष की अवस्था में विकसित हो रहे हैं।
आज यह मध्यप्रदेश की विशेष पहचान बन चुकी है। कट्टीवाड़ा क्षेत्र में नूरजहाँ आम की ख्याति वर्षों पुरानी है। इसकी विशिष्टता को देखते हुए वर्ष 1999 तथा 2010 में इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों ने न केवल किसानों का उत्साह बढ़ाया बल्कि आलीराजपुर जिले को भी राष्ट्रीय पहचान दिलाई। धीरे-धीरे यह आम मध्यप्रदेश की उद्यानिकी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया।
नूरजहाँ आम का इतिहास मालवा और पश्चिमी भारत की सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ा माना जाता है। कहा जाता है कि मुगलकाल में बड़े आकार और विशेष स्वाद वाले आमों को शाही बागों में
विशेष महत्व दिया जाता था। इसी परंपरा से जुड़ी यह किस्म समय के साथ गुजरात और झाबुआ-आलीराजपुर अंचल तक पहुंची। आदिवासी बाहुल्य इस क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और तापमान नूरजहाँ के लिए अनुकूल सिद्ध हुए, जिसके कारण यह किस्म यहां अच्छी तरह विकसित हुई। झाबुआ और आलीराजपुर के सीमावर्ती क्षेत्रों में इसका संरक्षण किसानों द्वारा पीढ़ी दर पीढ़ी किया जाता रहा है।
विदेशों में भी नूरजहाँ आम की विशेष मांग देखी जा रही है। विशेष रूप से संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कतर और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में भारतीय प्रीमियम आमों की अच्छी मांग रहती है। वहां बड़े आकार और आकर्षक स्वरूप वाले फलों को विशेष पसंद किया जाता है। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा तथा यूनाइटेड किंगडम में बसे भारतीय समुदाय के बीच भी भारतीय आम अत्यंत लोकप्रिय हैं। दक्षिण-पूर्व एशिया के सिंगापुर और मलेशिया जैसे देशों में भी इसकी विशेष पहचान बन रही है।
हालांकि नूरजहाँ आम का उत्पादन सीमित मात्रा में होता है, इसलिए इसका निर्यात बड़े पैमाने पर नहीं हो पाता, लेकिन इसकी विशिष्टता और दुर्लभता इसे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में “लक्ज़री मैंगो” की पहचान दिला रही है। विदेशी बाजारों में यह आम आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
मध्यप्रदेश सरकार और उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को आधुनिक तकनीकों, उन्नत पौधों, ड्रिप सिंचाई तथा फल प्रसंस्करण के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे प्रदेश में आम उत्पादन बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि हो रही है। आज मध्यप्रदेश का आम केवल स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि किसानों की समृद्धि, कृषि नवाचार और प्रदेश की वैश्विक पहचान का माध्यम बन चुका है।

