आलोक अवस्थी उत्तर प्रदेश प्रभारी शब्द मेल समाचार
कानपुर। आईटीबीपी जवान की मां के कथित रूप से कटा हाथ लगाने के मामले ने प्रदेश ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोर ली हैं। मामले की गूंज लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सुनाई दी, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मच गया। बढ़ते दबाव और गंभीर सवालों के बीच कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. हरिदत्त नेमी को उनके पद से हटाकर जालौन भेज दिया गया है। वहीं उनकी जगह डॉ. अवधेश यादव को कानपुर का नया सीएमओ नियुक्त किया गया है।
मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली, अस्पतालों की जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। शहर में चर्चा है कि लंबे समय से विवादों में रहे स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सूत्रों की मानें तो शासन स्तर पर पूरे प्रकरण की समीक्षा की जा रही है और लापरवाही बरतने वाले अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्थाओं को लेकर जनता में भी भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते उचित चिकित्सा सुविधा और संवेदनशीलता दिखाई जाती तो मामला इतना गंभीर रूप नहीं लेता। सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों ने भी दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
वहीं इस पूरे मामले में पुलिस विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि पीड़ित आईटीबीपी जवान को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक इधर-उधर भटकना पड़ा। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने पर जवान को अपने वरिष्ठ अधिकारियों तक मामला पहुंचाना पड़ा, जिसके बाद प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हुआ।
फिलहाल शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। स्वास्थ्य विभाग में हुए इस बड़े प्रशासनिक बदलाव को इसी प्रकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि इस संवेदनशील मामले में आखिर जिम्मेदारी किसकी बनती है।

