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सनसनी

ख़ामोश हो गई मधुर आवाज सदा के लिए।

Shabdmail News
Last updated: April 13, 2026 6:54 am
Shabdmail News
Published: April 13, 2026
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नाम गुम जाएगा चेहरा यह बदल जाएगा मेरी आवाज़ ही पहचान है

लेखक: जय प्रकाश विश्वकर्मा सम्पादक – शब्द मेल समाचार पत्र

यह खूबसूरत उस गीत की चन्द लाईनें जीवन के उस आखिरी पड़ाव की ओर ले जाती हैं जहां से लौट कर कभी कोई वापस नहीं आय देश-विदेशों में अपनी आवाज जादू बिखेरने वाली सुरों की मलिका या सुरों की कोकिला आज हम सब को गमगीन कर गई आशा जी का फिल्मी सफर में अनेकों उतार चढ़ाव देखेने को मिले
आईए जानते हैं आशा जी के जीवन के कुछ अहम् पहलुओं को।
–  आशा जी का जन्म
आशा भोंसले जी का जन्म 8 सितंबर 1933 को सांगली (महाराष्ट्र) में हुआ था।
उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर,एक प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक और नाट्य कलाकार थे।
उनकी माता का नाम सावित्री मंगेशकर था ।
आशा भोंसले जी एक संगीत परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके भाई-बहन भी संगीत जगत में प्रसिद्ध हैं लता मंगेशकर (बड़ी बहन, स्वर कोकिला)
ऊषा मंगेशकर एवं भाई ह्रदय नाथ मंगेशकर
पारिवारिक विशेषता
उनका पूरा परिवार संगीत से जुड़ा हुआ था, इसलिए बचपन से ही आशा जी को गायन की प्रेरणा और प्रशिक्षण मिला। उनके पिता ने ही उन्हें संगीत की प्रारंभिक शिक्षा दी।
* आशा जी का फिल्मी सफर
का फिल्मी सफर भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक प्रेरणादायक और संघर्षपूर्ण कहानी है। उनका करियर कई दशकों तक फैला रहा और उन्होंने हजारों गीतों को अपनी आवाज़ दी।
शुरुआती दौर (1940–1950)
आशा जी ने बहुत छोटी उम्र में ही गायन शुरू कर दिया था। उनके पिता दीनानाथ मंगे के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई।
उन्होंने पहली बार 1943 में मराठी फिल्म में गाना गाया।
हिंदी फिल्मों में उनका शुरुआती गीत फिल्म चुनरिया (1948) में था।
शुरुआत में उन्हें छोटे बजट की फिल्मों और बी-ग्रेड गानों तक ही सीमित रखा गया।
*- पहचान का दौर (1950–1960)
इस समय आशा जी को धीरे-धीरे पहचान मिलने लगी।
संगीतकार ओपी नाईयर ने उन्हें बड़ा मौका दिया।
फिल्म CID (1956) और नया दौर (1957) के गानों से वे चर्चित हुईं।
उनकी आवाज़ को एक अलग, चुलबुला और मॉडर्न अंदाज के रूप में पहचान मिली
*- स्वर्णिम दौर (1960–1980)
यह आशा भोंसले जी के करियर का सबसे सफल समय था।
संगीतकार आर डी बर्मन साहब के साथ उनकी जोड़ी बहुत हिट रही।
तीसरी मंजिल (1966) के गाने—”आ जा आ जा…” और “ओ हसीना…” ने उन्हें नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
उमराव जान (1981) के गानों (“दिल चीज़ क्या है”) के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
उन्होंने रोमांटिक, ग़ज़ल, कैबरे, पॉप—हर शैली में गाने गाए।
आशा जी की सबसे बड़ी खासियत उनकी रही—
उन्होंने हेलन जैसी डांसर के लिए कैबरे गाने भी गाए।
ग़ज़ल, भजन, पॉप, क्लासिकल—हर प्रकार के गीतों में महारत हासिल की।
कई भारतीय भाषाओं में आशा जी ने लगभग 12,000 से भी अधिक गाने गाए।
आशा जी को केई बार फिल्म फेयर अवार्ड,
2 बार नेशनल अवार्ड।
आशा भोंसले जी को भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
प्रसिद्ध गायिका आशा भोंसले जी अब हमारे बीच में नहीं हैं आशा जी 92 वर्ष में हमें छोड़कर चली गई। उन्होंने मुम्बई के कैंडी अस्पताल में इलाज के दौरान अन्तिम सांस ली आशा जी को दिल का दौरा पड़ने पर मुम्बई के कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
लेकिन आशा जी के द्वारा गये हुए गाने जब भी सुनेंगे तब तब हमें उनकी (आशा भोंसले) जी की याद दिलाते रहेंगे आशा जी अपनी मधुर आवाज के द्वारा सदैव लोगों के दिलों में जिंदा रहेंगी
शब्द मेल समाचार समूह की ओर से
प्रसिद्ध गायिका आशा भोंसले जी को भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित करता है।
लेखक
जय प्रकाश विश्वकर्मा
सम्पादक – शब्द मेल समाचार पत्र

Contents
  • नाम गुम जाएगा चेहरा यह बदल जाएगा मेरी आवाज़ ही पहचान है
    • लेखक: जय प्रकाश विश्वकर्मा सम्पादक – शब्द मेल समाचार पत्र
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