न्यूज़ सोर्स हेल्प डेस्क
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इन दिनों इंडोनेशिया की आधिकारिक राजकीय यात्रा पर हैं। 7 जुलाई 2026 को जकार्ता में उनका भव्य स्वागत किया गया, जहां उन्होंने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और इंडोनेशिया की संसद को भी संबोधित किया। यह यात्रा भारत की “एक्ट ईस्ट” नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, अंतरिक्ष सहयोग और निवेश जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। दोनों देशों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और मुक्त समुद्री मार्ग सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की संसद में अपने संबोधन के दौरान भारत और इंडोनेशिया के हजारों वर्षों पुराने सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को केवल समुद्र ही नहीं जोड़ता, बल्कि रामायण, महाभारत, बौद्ध विरासत, गरुड़, बोरोबुदुर और प्रम्बानन जैसे ऐतिहासिक प्रतीक भी दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक पहचान हैं। उन्होंने भारत को “विकासवाद” में विश्वास रखने वाला देश बताते हुए कहा कि भारत का उद्देश्य सहयोग, साझेदारी और साझा समृद्धि है। इस दौरे की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक प्रधानमंत्री मोदी को इंडोनेशिया का सर्वोच्च नागरिक सम्मान “बिंतांग आदिपूर्ण” प्रदान किया जाना रहा। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने यह सम्मान भारत-इंडोनेशिया संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने में उनके योगदान के लिए प्रदान किया। रक्षा सहयोग भी इस यात्रा का प्रमुख केंद्र रहा। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली सहित रक्षा सहयोग को लेकर भी सकारात्मक चर्चा हुई, हालांकि अंतिम समझौतों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भी भारत को बड़ी सफलता मिली। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारतीय UPI भुगतान प्रणाली को इंडोनेशिया की भुगतान प्रणाली से जोड़ा जाएगा। इससे भारतीय पर्यटक, व्यवसायी और प्रवासी बिना नकदी या मुद्रा विनिमय की परेशानी के सीधे डिजिटल भुगतान कर सकेंगे। यह कदम दोनों देशों के व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा देगा। यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत विशेष रूप से चर्चा में रहा। जकार्ता पहुंचने पर इंडोनेशियाई वायुसेना के फाइटर जेट्स ने उनके विमान को एस्कॉर्ट किया, जबकि राष्ट्रपति स्वयं एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए मौजूद रहे। इसे दोनों देशों के मजबूत विश्वास और बढ़ती रणनीतिक निकटता का प्रतीक माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की हिंद-प्रशांत नीति को और मजबूती देगी। इंडोनेशिया दक्षिण-पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश है और समुद्री व्यापार मार्गों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के लिए लाभदायक साबित हो सकता है।

