पौराणिक उत्पत्ति: हिंदू मान्यताओं के अनुसार
पौराणिक उत्पत्ति: हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध रामायण काल से है। माना जाता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने के बाद, भगवान राम ने ब्रह्महत्या के दोष (रावण वध के कारण) से मुक्ति पाने के लिए यहाँ भगवान शिव की आराधना की थी। देवी सीता ने समुद्र की रेत से एक शिवलिंग बनाया, जिसे ‘रामलिंगम’ कहा जाता है। वहीं, हनुमान जी कैलाश से जो शिवलिंग लाए थे, उसे ‘विश्वलिंगम’ कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, आज भी पहले विश्वलिंगम की पूजा की जाती है।
2. वास्तुशिल्प का विकास: वर्तमान मंदिर की भव्य संरचना का निर्माण मुख्य रूप से 12वीं शताब्दी में पाण्ड्य राजाओं द्वारा शुरू किया गया था। बाद में, विजयनगर साम्राज्य के शासकों और जाफना के राजाओं ने भी इसके विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
3. विश्व प्रसिद्ध गलियारा: रामेश्वरम मंदिर अपने विशाल और नक्काशीदार गलियारों (Corridors) के लिए जाना जाता है। इस मंदिर का बाहरी गलियारा लगभग 1220 मीटर लंबा है, जिसे दुनिया का सबसे लंबा मंदिर गलियारा माना जाता है। इसमें लगभग 1212 स्तंभ हैं, जिन पर अद्भुत कलाकृति उकेरी गई है।
4. पवित्र तीर्थ (22 कुण्ड): मंदिर के परिसर में 22 पवित्र जल के स्रोत या कुण्ड हैं। ऐसी मान्यता है कि इन सभी कुण्डों में स्नान करने से शरीर और आत्मा की शुद्धि होती है। इन्हें ‘तीर्थम’ कहा जाता है।
5. चार धामों में से एक: आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार धामों (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी और रामेश्वरम) में से यह दक्षिण का प्रमुख धाम है। यह शैव और वैष्णव दोनों संप्रदायों के लिए एकता का प्रतीक है।

