कला शैली और और धर्म का अद्भुत संगम
सोमनाथ मंदिर हिन्दुओं के आस्था का प्रतीक ही नहीं बल्कि अपने भीतर भारत का इतिहास समेटे हुए है ।
गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित सोमनाथ मंदिर एक अद्भुत धार्मिक तीर्थ स्थल है।
जिसका वर्णन ऋग्वेद में भी मिलता है ।सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिलिंग में सर्वप्रथम माना गया है
सोमनाथ मन्दिर प्राचीन काल में और पौराणिक कथाओं की मानें तो प्रथम बार,इस मन्दिर का निर्माण श्याम चंद्र देव ने मंदिर का निर्माण सोने स करावाया था फिर त्रेता युग में रावण ने इसका निर्माण चांदी से करवाया ।
दुआपुर युग में भगवान श्री कृष्ण ने इस मंदिर का निर्माण चंदन की काठ से कराया इसके बाद राजा भीमदेव ने इसका निर्माण पत्थर से करवाया।
मुगल काल के दौड़ में अपनी अंचल संपत्ति और धार्मिक महत्व के कारण कई बार सोमनाथ मंदिर पर मुगल शासको ने आक्रमण कर इसे अपना निशाना बनाया महमूद गजनवी ने 1024 से 1025 में सबसे बड़ा , सबसे घातक हमला किया उसने मंदिर को लूटने के साथ साथ शिवलिंग को खंडित भी किया जिसमें सोमनाथ मंदिर को भारी नुकसान हुआ 1299 में अलाउद्दीन खिलची दिल्ली के सल्तनत के शासक अलाउद्दीन खिलची की सेना ने भी इस मंदिर को तहस-नहस किया मुग़ल बादशाह के द्वारा सोमनाथ मन्दिर पर हमला करने का सिलसिला यही नहीं रूका इसके बाद भी औरंगज ने 1660-1700 में मंदिर को औरंगजेब ने अपने शासनकाल में सोमनाथ मंदिर को गिराने के औरंगजेब ने भारत में हिन्दू धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाई साथ सोमनाथ मंदिर को हटाने का आदेश भी दिया। वर्ष 1947 के बाद आजादी के दौड़ में लोह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के जिर्णोद्धार का संकल्प लिया और 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद शुक्ल ने नवनिर्मित मंदिर में ज्योतिर्लिंग की प्राण प्रतिष्ठा की वर्तमान मंदिर का निर्माण चालुक्य शैली यानी कैलाश मा मेरु प्रसाद शैली में किया गया सोमनाथ मंदिर के वन स्तंभ की विशेषता देखें तो मंदिर के दक्षिण में समुद्र किनारे एक स्तंभ है जिसे बाद स्तंभ कहा जाता है इस मंदिर पर लिखा है कि उसे बिंदु को लेकर दक्षिण ध्रुव तक सीधी रेखा भूमिका कोई भी टुकड़ा नहीं आता यह प्राचीन और भारतीय भौगोलिक और वैज्ञानिक के ज्ञान का अद्भुत प्रमाण है सोमनाथ मंदिर केवल हिंदुओं की धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि विनाश की हर एक कोशिश के बाद भी सत्य और आस्था का उदय होना बताता है ।
सोमनाथ मंदिर का भारतीय सभ्यता के उत्थान पतन और फिर भी जी उठने की जीवित कहानी है ।इसे अमृत मंदिर भी कहा जाता है क्योंकि बार-बार नष्ट किए जाने के बावजूद भी आज भी गर्व से खड़ा है और यह सोमनाथ मंदिर बीते हुए इतिहास की अपनी गाथा व्यक्त करता है। जहां हजारों की तादात में भक्त जाकर अपनी मनोकामना के साथ पूरी होने के साथ मन्दिर के इतिहास को भी गहराई से अध्ययन करते हैं
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