देश में स्वरोजगार और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “प्रधानमंत्री मुद्रा योजना” आज लाखों लोगों के लिए आर्थिक मजबूती का माध्यम बन चुकी है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत छोटे व्यापारियों, युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों को बिना गारंटी आसान लोन उपलब्ध कराया जाता है ताकि वे अपना व्यवसाय शुरू कर सकें या उसे आगे बढ़ा सकें। हाल के वर्षों में इस योजना का प्रभाव तेजी से बढ़ा है और सरकार इसे आत्मनिर्भर भारत अभियान की महत्वपूर्ण कड़ी मान रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत 8 अप्रैल 2015 को की गई थी। योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे लोगों को आर्थिक सहायता देना है जिन्हें सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया में आसानी से लोन नहीं मिल पाता। इसके अंतर्गत छोटे दुकानदार, स्वरोजगार करने वाले युवा, महिला उद्यमी, स्टार्टअप शुरू करने वाले लोग, कारीगर, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी और ग्रामीण क्षेत्र के छोटे कारोबारी शामिल हैं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अब तक इस योजना के तहत करोड़ों लोगों को लोन वितरित किया जा चुका है। हाल ही में जारी आंकड़ों में बताया गया कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 11 वर्षों में 57 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए गए और लगभग 40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि वितरित की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस योजना ने छोटे कारोबारियों को नई पहचान और आर्थिक मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मुद्रा योजना के अंतर्गत चार प्रमुख श्रेणियां बनाई गई हैं — शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस। शिशु श्रेणी में छोटे स्तर के व्यवसाय के लिए शुरुआती लोन दिया जाता है, जबकि किशोर और तरुण श्रेणी में व्यवसाय विस्तार के लिए बड़ी राशि उपलब्ध कराई जाती है। वर्तमान में योजना के तहत 20 लाख रुपये तक का बिना गारंटी लोन उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेष बात यह है कि महिलाओं को इस योजना में बड़ी संख्या में लाभ मिला है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार मुद्रा योजना के तहत स्वीकृत कुल ऋणों में महिलाओं की हिस्सेदारी काफी अधिक रही है। कई महिलाएं सिलाई सेंटर, ब्यूटी पार्लर, डेयरी, फूड बिजनेस और ऑनलाइन कारोबार शुरू कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों को भी इसका लाभ मिल रहा है। योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया भी पहले की तुलना में आसान बनाई गई है। इच्छुक व्यक्ति बैंक, NBFC या माइक्रो फाइनेंस संस्थानों के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आधार कार्ड, पहचान पत्र, व्यवसाय से संबंधित जानकारी और बैंक खाते की आवश्यकता होती है। कई बैंक ऑनलाइन आवेदन सुविधा भी उपलब्ध करा रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान समय में रोजगार के अवसरों के साथ स्वरोजगार को बढ़ावा देना भी जरूरी है। मुद्रा योजना ने युवाओं को नौकरी खोजने के बजाय खुद का रोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। इससे छोटे शहरों और गांवों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं। कई युवाओं ने मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर सेंटर, ऑनलाइन सर्विस, ट्रांसपोर्ट और कृषि आधारित व्यवसाय शुरू किए हैं।
हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि कई बार बैंक स्तर पर प्रक्रिया लंबी हो जाती है या दस्तावेजों को लेकर परेशानी आती है। इसके बावजूद योजना को छोटे व्यवसायों के लिए बड़ी मदद माना जा रहा है। सरकार भी समय-समय पर लोन प्रक्रिया को सरल बनाने और अधिक लोगों तक पहुंचाने के प्रयास कर रही है।

