देशभर में महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार नई योजनाएं चला रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, रोजगार के अवसर देना और उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है। वर्तमान समय में महिलाओं से जुड़ी कई योजनाएं चर्चा में हैं जिनका लाभ लाखों महिलाएं उठा रही हैं।
सरकार की सबसे चर्चित योजनाओं में “लाड़ली बहना योजना” प्रमुख मानी जा रही है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि वे अपनी छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा कर सकें। योजना का लाभ विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को मिल रहा है। महिलाओं का कहना है कि इस सहायता से उन्हें घर खर्च और बच्चों की पढ़ाई में मदद मिल रही है।
इसके अलावा “उज्ज्वला योजना” भी महिलाओं के लिए बड़ी राहत साबित हुई है। इस योजना के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। इससे गांवों में लकड़ी और धुएं से होने वाली परेशानियों में कमी आई है। महिलाओं के स्वास्थ्य पर इसका सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। सरकार का दावा है कि योजना से करोड़ों परिवार लाभान्वित हुए हैं।
महिलाओं के स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए “प्रधानमंत्री मुद्रा योजना” के तहत बिना गारंटी छोटे लोन भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। कई महिलाएं सिलाई, ब्यूटी पार्लर, डेयरी, किराना दुकान और घरेलू उद्योग शुरू कर आर्थिक रूप से मजबूत बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए “आयुष्मान भारत योजना” के माध्यम से महिलाओं को मुफ्त इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। गरीब परिवारों की महिलाओं को अस्पतालों में इलाज के लिए आर्थिक चिंता कम हुई है। कई राज्यों में गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं ताकि मातृ और शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके।
शिक्षा के क्षेत्र में भी सरकार ने बालिकाओं और महिलाओं के लिए कई कदम उठाए हैं। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” अभियान के जरिए बालिका शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रवृत्ति योजनाएं और मुफ्त साइकिल वितरण जैसी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं ताकि लड़कियां पढ़ाई जारी रख सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं को केवल आर्थिक सहायता देना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें शिक्षा, कौशल और रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से कई राज्यों में सिलाई, कंप्यूटर, डिजिटल स्किल और स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इससे महिलाएं छोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
हाल के वर्षों में महिलाओं की भागीदारी राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी योजनाओं का इसमें बड़ा योगदान रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी कमाई कर रही हैं।
सरकार का कहना है कि आने वाले समय में महिलाओं के लिए और नई योजनाएं शुरू की जाएंगी ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य के बेहतर अवसर मिल सकें। वर्तमान में महिलाओं से जुड़ी योजनाएं देश में सामाजिक और आर्थिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही हैं।

