गगनेश तिवारी ब्यूरो शब्द मेल समाचार बिल्हौर कानपुर नगर
बिल्हौर। केंद्र एवं प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत सरोवर योजना का उद्देश्य जल संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों का पुनर्जीवन करना है, लेकिन बिल्हौर ब्लॉक की ग्राम पंचायत मेडुआ में यह योजना पांच वर्ष बाद भी अपने लक्ष्य से कोसों दूर नजर आ रही है। यहां अमृत सरोवर के नाम पर हुए विकास कार्य अब सवालों के घेरे में हैं। कागजों में करोड़ों की योजनाओं और विकास के दावों के बीच धरातल पर तालाब सूखा पड़ा है तथा कई निर्माण कार्य अधूरे दिखाई दे रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार अमृत सरोवर के निर्माण एवं सुंदरीकरण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन आज भी तालाब में पानी नहीं है। सरोवर परिसर में जलकुंभी, झाड़ियां और गंदगी फैली हुई है, जिससे इसकी उपयोगिता समाप्त होती जा रही है। वहीं सरोवर के चारों ओर कराया गया इंटरलॉकिंग कार्य भी अधूरा पड़ा है, जिससे योजना की गुणवत्ता और कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
मौके पर लगे शिलापट के अनुसार ग्राम पंचायत मेडुआ में निर्मित अमृत सरोवर की लंबाई 60 मीटर तथा चौड़ाई 70 मीटर दर्ज है। ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू होने के समय सरोवर को गांव के जल संरक्षण, भूजल स्तर सुधार और सौंदर्यीकरण का केंद्र बताया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद यह उद्देश्य पूरा नहीं हो सका।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी की गई और समय-समय पर रखरखाव नहीं होने के कारण सरोवर बदहाली का शिकार हो गया। उनका कहना है कि यदि नियमित सफाई, जलभराव की व्यवस्था और अधूरे निर्माण कार्यों को समय रहते पूरा कराया जाता तो यह सरोवर ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो सकता था।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि अमृत सरोवर योजना के तहत हुए कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, खर्च की समीक्षा की जाए तथा अधूरे पड़े निर्माण कार्यों को शीघ्र पूरा कराया जाए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों की जवाबदेही भी तय की जाए, ताकि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ वास्तव में गांव के लोगों तक पहुंच सके।

