मोहन कैबिनेट का बड़ा निर्णय: 2031 तक जारी रहेंगी कई योजनाएं, 36 हजार करोड़ से अधिक शिक्षा पर खर्च; तीन बड़ी सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को मिलेगा लाभ
भोपाल, 15 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश में विकास और जनकल्याण से जुड़े कामों को गति देने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास, अधोसंरचना के सुदृढ़ीकरण और जनकल्याण से जुड़ी योजनाओं के लिए 42 हजार 490 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन फैसलों में शिक्षा, परिवहन, उद्यानिकी, सिंचाई, कृषि, प्रशासनिक व्यवस्था और सहकारिता से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं।
सरकार के इन फैसलों को मध्य प्रदेश के आगामी वर्षों के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सबसे बड़ा प्रावधान समग्र शिक्षा योजना के लिए किया गया है। इसके अलावा उज्जैन, सिंगरौली और चंदेरी की सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है, जिससे हजारों किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद है।
समग्र शिक्षा के लिए ₹36,006 करोड़ से अधिक
कैबिनेट के फैसलों में शिक्षा क्षेत्र सबसे प्रमुख रहा। सरकार ने केंद्र प्रवर्तित समग्र शिक्षा योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 36,006.22 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इस योजना का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार करना और शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक तथा लैंगिक असमानता को कम करना है।
समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत पूर्व प्राथमिक से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा संबंधी प्रावधान किए जाते हैं। इसमें 4 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के विद्यार्थियों को शामिल किया गया है।
सरकार का जोर केवल स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने पर भी है। शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों—एससीईआरटी, राज्य शिक्षा संस्थान और डाइट—को मजबूत करने की दिशा में भी योजना के तहत काम किया जाएगा।
इस फैसले का उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना भी है।
परिवहन व्यवस्था के लिए ₹1,166 करोड़ से अधिक
कैबिनेट ने परिवहन विभाग की विभिन्न योजनाओं को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 1,166 करोड़ 60 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। इसके तहत परिवहन व्यवस्था, चेक प्वाइंट, विभागीय कार्यालयों और नागरिक सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।
उड़नदस्ता एवं चेक प्वाइंट की स्थापना और संचालन के लिए 377 करोड़ 41 लाख रुपये, जबकि जिला स्तर के स्थापना व्यय के लिए 361 करोड़ 89 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
विभागीय मुख्यालय के स्थापना व्यय के लिए भी राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा राज्य परिवहन अपीलीय अधिकरण के संचालन के लिए भी वित्तीय प्रावधान किया गया है।
सरकार का मानना है कि परिवहन व्यवस्था मजबूत होने से आम लोगों की आवाजाही, सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
स्मार्ट कार्ड और सड़क सुरक्षा पर भी जोर
डिजिटल सेवाओं और परिवहन अधोसंरचना से संबंधित स्मार्ट कार्ड योजना को जारी रखने के लिए 245 करोड़ 55 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
इसके अलावा विभागीय कार्यालय भवनों के निर्माण, मौजूदा परिसंपत्तियों के रखरखाव और ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए भी राशि मंजूर की गई है। कुशल वाहन चालकों को तैयार करने के लिए ड्राइविंग प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण परिवहन नीति के क्रियान्वयन का भी फैसला लिया गया है।
सड़क दुर्घटनाओं के समय घायलों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘नेक व्यक्ति पुरस्कार’ का प्रावधान भी जारी रहेगा। सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के लिए निर्भया फंड के तहत भी वित्तीय प्रावधान किया गया है।
किसानों के लिए बड़ी खबर, तीन सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी
मध्य प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए कैबिनेट के सिंचाई संबंधी फैसले बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बैठक में उज्जैन, सिंगरौली और चंदेरी की तीन सिंचाई परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी गई। इन परियोजनाओं पर अलग-अलग वर्षों में बड़ा निवेश किया जाएगा और इनके पूरा होने से बड़े क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित होने की उम्मीद है।
उज्जैन की चितावद परियोजना
उज्जैन जिले के महिदपुर तहसील क्षेत्र के पास क्षिप्रा नदी पर प्रस्तावित चितावद वृहद सिंचाई परियोजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने के लिए 1,846 करोड़ 5 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है।
इस परियोजना का उद्देश्य सिंचाई बांध का निर्माण कर जल संग्रहण के माध्यम से लगभग 65 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है।
यदि परियोजना निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ती है तो इससे उज्जैन क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता में सुधार होने की उम्मीद है।
सिंगरौली की गौंड सिंचाई परियोजना
सिंगरौली जिले की गौंड वृहद सिंचाई परियोजना के लिए अगले पांच वर्षों तक निरंतरता को मंजूरी दी गई है। इसके लिए 749 करोड़ 62 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
परियोजना के तहत बांध निर्माण और सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था के माध्यम से लगभग 34,500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।
इससे सिंगरौली जिले के किसानों को कृषि उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना
अशोकनगर जिले की चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना को भी वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है। इसके लिए 11 करोड़ 49 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
इस परियोजना का उद्देश्य लगभग 28 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई सुविधा विकसित करना है।
उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार ने उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की आठ राज्य पोषित योजनाओं को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए कुल 491 करोड़ रुपये का वित्तीय प्रावधान किया गया है।
इन योजनाओं में फल पौध रोपण और मसाला क्षेत्र विस्तार के लिए 100-100 करोड़ रुपये का प्रावधान है।
संरक्षित खेती को बढ़ावा देने के लिए 85 करोड़ रुपये, फसल बीमा और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के लिए 53-53 करोड़ रुपये तथा कोल्ड चेन अधोसंरचना के लिए 50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
किसानों के प्रशिक्षण और विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए भी राशि निर्धारित की गई है।
सरकार का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी, संरक्षित खेती और खाद्य प्रसंस्करण से जोड़कर उनकी आय के नए अवसर पैदा करना है।
तीन नए जिलों में खुलेंगे खनिज कार्यालय
मध्य प्रदेश के नवगठित मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा जिलों में जिला कार्यालय की खनिज शाखाएं स्थापित करने का फैसला लिया गया है।
इसके लिए कुल 21 नए पदों को मंजूरी दी गई है। प्रत्येक जिले में सात-सात पद होंगे। इनमें खनिज अधिकारी, सहायक ग्रेड-2, सहायक ग्रेड-3, सहायक मानचित्रकार, सर्वेयर, सिपाही और भृत्य के पद शामिल हैं।
नए कार्यालय बनने से संबंधित जिलों में खनिज संसाधनों के प्रशासनिक कामकाज को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
अनूपपुर और शहडोल के स्कूलों में 36 नियमित पद
शिक्षा क्षेत्र में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय के तहत अनूपपुर और शहडोल जिलों के चार विद्यालयों के लिए 36 नियमित पदों को मंजूरी दी गई है।
इन विद्यालयों में प्राचार्य, माध्यमिक शिक्षक, प्राथमिक शिक्षक और सहायक ग्रेड-3 के पद शामिल हैं।
इससे संबंधित विद्यालयों में शिक्षकों और कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ेगी तथा विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलने की उम्मीद है।
लाड़ली बहना योजना से जुड़ा फैसला
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के हितग्राहियों को रक्षाबंधन के अवसर पर दी गई 250 रुपये की अतिरिक्त विशेष आर्थिक सहायता के संबंध में मुख्यमंत्री द्वारा 20 अगस्त 2026 को दिए गए आदेश और विभागीय आदेश का अनुसमर्थन भी किया है।
यह फैसला प्रदेश की महिला हितग्राहियों के लिए सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है।
MARKFED को ₹2,220 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण
कैबिनेट ने मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ यानी MARKFED से जुड़े महत्वपूर्ण वित्तीय प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है।
रबी विपणन वर्ष 2024-25 के खाद्यान्न साख-सीमा ऋण की शेष राशि के पुनर्भुगतान के लिए 2,220.62 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है।
सरकार के अनुसार इस राशि का पुनर्भुगतान 30 सितंबर 2026 तक सुनिश्चित किया जाना है। वित्त विभाग द्वारा राज्य की नकदी स्थिति और राजकोषीय घाटे की सीमा को ध्यान में रखते हुए ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा
कैबिनेट बैठक से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण फैसला सार्वजनिक परिवहन से संबंधित है। सरकार के अनुसार 25 सितंबर 2026 से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा शुरू करने की तैयारी है।
इस सेवा के अंतर्गत लगभग 150 सिटी रूट, 450 इंटरसिटी रूट और 436 अंतर्राज्यीय रूट प्रस्तावित किए गए हैं।
इस योजना का उद्देश्य शहरों के साथ-साथ प्रदेश के विभिन्न हिस्सों और दूसरे राज्यों के बीच सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना है।
7,500 से अधिक छात्राओं को ई-स्कूटी
सरकार की मुख्यमंत्री ई-स्कूटी योजना के तहत कक्षा 12वीं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 7,500 से अधिक विद्यार्थियों को ई-स्कूटी देने की जानकारी भी सामने आई है। इसके वितरण कार्यक्रम की तारीख 19 सितंबर बताई गई है।
इस योजना का उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है।
विकास योजनाओं से क्या बदलेगा?
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मंजूर किए गए इन प्रस्तावों का प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों में दिखाई देने की उम्मीद है। शिक्षा के क्षेत्र में बड़े वित्तीय प्रावधान से स्कूल शिक्षा और शिक्षक प्रशिक्षण को मजबूती मिल सकती है।
सिंचाई परियोजनाओं के पूरा होने से किसानों को कृषि के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। वहीं उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण की योजनाएं किसानों को परंपरागत फसलों के अलावा फल, मसाले, संरक्षित खेती और प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ सकती हैं।
परिवहन क्षेत्र में निवेश से सड़क सुरक्षा, डिजिटल सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को मजबूती मिलने की संभावना है। नए जिलों में खनिज कार्यालय खुलने से प्रशासनिक व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर बेहतर बनाया जा सकेगा।
सरकार के सामने चुनौती होगी समय पर क्रियान्वयन
हालांकि बड़ी राशि की स्वीकृति अपने आप में विकास की गारंटी नहीं होती। योजनाओं का वास्तविक लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए उनका समय पर क्रियान्वयन भी जरूरी होगा।
सिंचाई परियोजनाओं में भूमि, पर्यावरण, निर्माण और जल प्रबंधन जैसे कई पहलू जुड़े होते हैं। इसी तरह शिक्षा और परिवहन की योजनाओं के लिए भी विभागों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।
इसलिए अब लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि कैबिनेट से मंजूर योजनाएं कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं और इनका वास्तविक लाभ किसानों, विद्यार्थियों, महिलाओं, यात्रियों तथा आम नागरिकों तक कब पहुंचता है।
निष्कर्ष
मध्य प्रदेश सरकार ने 15 सितंबर 2026 की कैबिनेट बैठक में 42,490 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी देकर विकास का बड़ा खाका सामने रखा है। शिक्षा के लिए 36,006.22 करोड़ रुपये का प्रावधान इस फैसले का सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके साथ ही परिवहन, उद्यानिकी, सिंचाई, कृषि, प्रशासन और जनकल्याण से जुड़े कई फैसले लिए गए हैं।

