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- 2000 बीघा खेतों तक पहुंचने के लिए रोज नदी
- पार करते ग्रामीण, जर्जर नाव बनी मजबूरी; हादसों के बावजूद पुल का इंतजार
जितेन्द्र सिंह जीतू आगरा मंडल प्रभारी शब्द मेल समाचार
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मैनपुरी। विकास के दावों के बीच किशनी विकासखंड क्षेत्र के ग्राम परतापुर की तस्वीर व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। आजादी के 79 वर्ष बाद भी ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। नदी के दूसरी ओर ग्रामीणों की करीब 2000 बीघा कृषि भूमि है, जहां खेती-किसानी के कार्यों के लिए उन्हें प्रतिदिन नदी पार करनी पड़ती है। ग्रामीणों का आरोप है कि नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन आज तक उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
जर्जर नाव से नदी पार करने को मजबूर
ग्रामीणों के अनुसार नदी के दूसरी ओर स्थित खेतों तक पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है। जिस नाव के सहारे ग्रामीण नदी पार करते हैं, उसकी हालत भी बेहद खराब बताई जा रही है। इसके बावजूद खेती-किसानी की मजबूरी में ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाव से नदी पार करने के एवज में एक सीजन में प्रत्येक ग्रामीण को करीब 20 किलोग्राम अनाज भी देना पड़ता है।
बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता
नदी पार करते समय सबसे अधिक खतरा बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बना रहता है। ग्रामीणों का दावा है कि पूर्व में कई बार बच्चे नदी में डूब चुके हैं। ग्रामीणों ने किसी तरह उन्हें नदी से बाहर निकाला और कुछ मामलों में उपचार के लिए अस्पताल तक ले जाना पड़ा। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से लगा चुके हैं गुहार
ग्रामीणों का कहना है कि नदी पर पुल निर्माण के लिए कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मांग की जा चुकी है। सांसद के समक्ष भी पुल निर्माण की मांग रखी गई, लेकिन वर्षों बीतने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि हर बार आश्वासन तो मिलता है, लेकिन धरातल पर पुल निर्माण की दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया।
प्रदर्शन कर उठाई पुल निर्माण की मांग
समस्या से परेशान ग्रामीणों ने अब प्रदर्शन कर नदी पर स्थायी पुल निर्माण की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में जर्जर नाव के सहारे नदी पार करना कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकता है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से शीघ्र पुल निर्माण कराए जाने की मांग की है।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब करीब 2000 बीघा कृषि भूमि नदी के दूसरी ओर है और किसानों को रोजाना नदी पार करनी पड़ती है, तो आखिर कब तक उन्हें नाव के सहारे जिंदगी गुजारनी पड़ेगी? हादसों के बावजूद नदी पर स्थायी पुल का निर्माण कब होगा।

