नई दिल्ली, 13 जून 2026। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत की आर्थिक वृद्धि को नई गति देना, निवेश को प्रोत्साहित करना और बदलते वैश्विक परिदृश्य में देश की आर्थिक मजबूती बनाए रखना था।
प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों, वरिष्ठ अधिकारियों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया। बैठक में भारत की विकास दर को मजबूत बनाए रखने, निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजन बढ़ाने और दीर्घकालिक आर्थिक लक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने परिषद के सदस्यों से विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों को और तेज करने के सुझाव भी मांगे।
बैठक ऐसे समय में हुई जब दुनिया की कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भू-राजनीतिक तनाव, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता का सामना कर रही हैं। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक व्यापार पर प्रभाव पड़ने की आशंकाएं बढ़ी हैं। भारत, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इन परिस्थितियों पर लगातार नजर बनाए हुए है। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि भारत को वैश्विक संकटों के बावजूद अपनी विकास गति बनाए रखनी होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश को आर्थिक सुधारों में और अधिक तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि निवेश, उद्योग और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने “ईज ऑफ डूइंग बिजनेस” और “ईज ऑफ लिविंग” को और बेहतर बनाने के लिए नए कदमों पर चर्चा की। आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्यों ने भी भारत की आर्थिक स्थिति का विस्तृत आकलन प्रस्तुत किया। उन्होंने वैश्विक परिस्थितियों के प्रभाव, विदेशी निवेश की संभावनाओं और घरेलू मांग को मजबूत करने के उपायों पर अपने सुझाव दिए। परिषद ने माना कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहना आवश्यक है। बैठक में कृषि, विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और डिजिटल अर्थव्यवस्था की भूमिका पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने कहा कि इन क्षेत्रों में निरंतर सुधार और निवेश भारत की विकास दर को मजबूत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हाल के वर्षों में डिजिटल भुगतान, स्टार्टअप इकोसिस्टम और तकनीकी नवाचारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है, जिसे आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया। बैठक में सुझाव दिया गया कि निवेश प्रक्रियाओं को और सरल बनाया जाए तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जाए। सरकार का मानना है कि अधिक विदेशी निवेश से रोजगार सृजन, तकनीकी विकास और औद्योगिक विस्तार को बढ़ावा मिलेगा। बैठक के दौरान पश्चिम एशिया संकट के संभावित प्रभावों पर विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने ऊर्जा आपूर्ति, व्यापार मार्गों और वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर पड़ने वाले असर का आकलन प्रस्तुत किया। परिषद ने सुझाव दिया कि भारत को ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनानी चाहिए। आर्थिक सलाहकार परिषद ने यह भी माना कि भारत की मजबूत घरेलू मांग, बढ़ता डिजिटल ढांचा और सुधारवादी नीतियां देश को वैश्विक चुनौतियों से निपटने में सहायता प्रदान कर रही हैं। परिषद ने शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार सृजन को आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभों के रूप में रेखांकित किया। बैठक ऐसे समय में हुई है जब प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में अपने नेतृत्व के 12 वर्ष पूरे किए हैं। इस दौरान सरकार ने जीएसटी, यूपीआई, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI), दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) सहित कई महत्वपूर्ण आर्थिक सुधार लागू किए हैं। सरकार का दावा है कि इन सुधारों ने भारत की आर्थिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक केवल वर्तमान चुनौतियों से निपटने तक सीमित नहीं थी, बल्कि विकसित भारत (Viksit Bharat) के दीर्घकालिक लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने की रणनीति तैयार करने का भी प्रयास थी। सरकार आने वाले वर्षों में बुनियादी ढांचे, विनिर्माण, तकनीक और मानव संसाधन विकास पर विशेष ध्यान देने की योजना बना रही है। कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री मोदी और आर्थिक सलाहकार परिषद की यह बैठक भारत की आर्थिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। वैश्विक अस्थिरता और चुनौतियों के बावजूद भारत को तेज विकास दर, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन के रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए सरकार सक्रिय रूप से रणनीति तैयार कर रही है। आने वाले समय में इन चर्चाओं के आधार पर कई नई नीतिगत घोषणाएं और सुधारात्मक कदम सामने आ सकते हैं, जो देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देंगे।

