फ्रांस के एवियन-ले-बैंस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन 2026 में प्रधानमंत्री Narendra Modi की भागीदारी वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। लगातार सातवीं बार G7 सम्मेलन में शामिल होकर प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल भारत की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को प्रदर्शित किया, बल्कि दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। G7 विश्व की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इस वर्ष फ्रांस की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में भारत, ब्राजील, दक्षिण कोरिया और केन्या जैसे देशों को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में बुलाया गया। सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा सुरक्षा, यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा हुई।
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के दौरान कहा कि आज दुनिया संसाधनों की कमी से नहीं, बल्कि विश्वास की कमी से जूझ रही है। उन्होंने वैश्विक सहयोग को “दाता और प्राप्तकर्ता” की सोच से आगे बढ़ाकर समान साझेदारी पर आधारित बनाने का आह्वान किया। भारत ने एक बार फिर ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की आवाज को मजबूती से उठाया।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की सबसे चर्चित मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के साथ रही। दोनों नेताओं की यह लगभग 16 महीने बाद पहली प्रत्यक्ष मुलाकात थी। दोनों के बीच व्यापार, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति तथा वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा दे सकती है। प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer से भी महत्वपूर्ण वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन संबंधों की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। हाल में हुए व्यापार समझौते को दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण बताया गया। इस बैठक में निवेश, तकनीकी सहयोग, शिक्षा और रक्षा क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर चर्चा हुई। कनाडा के प्रधानमंत्री Mark Carney के साथ हुई बैठक भी काफी अहम रही। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, व्यापार बढ़ाने और विभिन्न वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम करने पर चर्चा की। यह बैठक भारत-कनाडा संबंधों में सकारात्मक संकेत के रूप में देखी जा रही है।
सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni, मिस्र के राष्ट्रपति Abdel Fattah el-Sisi तथा संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan से भी मुलाकात की। इन बैठकों में ऊर्जा, निवेश, रक्षा, खाद्य सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, खाद्य आपूर्ति, उर्वरक और ऊर्जा बाजारों पर पड़ रहा है। उन्होंने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया और कहा कि नाविकों की सुरक्षा पूरी दुनिया की सामूहिक जिम्मेदारी है। भारत ने सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, डिजिटल नवाचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे मुद्दों पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि तकनीक और AI का उपयोग मानव कल्याण के लिए होना चाहिए तथा विकासशील देशों को भी नई तकनीकों तक समान पहुंच मिलनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि G7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भारत अब केवल क्षेत्रीय शक्ति नहीं बल्कि वैश्विक निर्णयों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण देश बन चुका है। दुनिया के बड़े देशों के साथ लगातार संवाद, रणनीतिक साझेदारी और वैश्विक मुद्दों पर भारत की स्पष्ट भूमिका ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसकी साख को और मजबूत किया है। कुल मिलाकर, G7 शिखर सम्मेलन 2026 भारत के लिए कूटनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। प्रधानमंत्री मोदी की विभिन्न विश्व नेताओं के साथ हुई बैठकें न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई मजबूती देंगी, बल्कि भारत को वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े प्रमुख निर्णयों में और प्रभावशाली भूमिका निभाने का अवसर भी प्रदान करेंगी।

