पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा राजनीतिक संकट देखने को मिल रहा है
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों बड़ा राजनीतिक संकट देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और राज्यपाल R. N. Ravi के बीच टकराव लगातार बढ़ता जा रहा है। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को बड़ा झटका लगने के बाद भी ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद राज्यपाल ने बड़ा संवैधानिक कदम उठाते हुए विधानसभा और मंत्रिमंडल को भंग कर दिया। जानकारी के अनुसार, चुनाव परिणामों में भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिला है। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रही और कई सीटों पर गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि जनता के जनादेश के साथ अन्याय हुआ है, इसलिए वह तुरंत इस्तीफा नहीं देंगी। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में संवैधानिक बहस शुरू हो गई। राज्यपाल आर. एन. रवि ने हालात को देखते हुए संवैधानिक विशेषज्ञों से सलाह ली। इसके बाद विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने पर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 174(2)(b) के तहत विधानसभा भंग करने का फैसला लिया। साथ ही ममता सरकार के मंत्रिमंडल को भी समाप्त कर दिया गया। इस फैसले के बाद ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहीं। बीजेपी नेताओं ने राज्यपाल के इस कदम का समर्थन किया और कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। भाजपा का कहना है कि जनता ने परिवर्तन के पक्ष में मतदान किया है और अब नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो चुका है। दूसरी ओर टीएमसी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया और कहा कि पार्टी चुनाव परिणामों को अदालत में चुनौती दे सकती है। राजनीतिक तनाव के बीच बंगाल में माहौल काफी गर्म हो गया है। कई जिलों से राजनीतिक हिंसा और प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि राज्य में कानून व्यवस्था बिगड़ रही है, जबकि टीएमसी नेताओं ने बीजेपी पर माहौल खराब करने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा लगातार ट्रेंड कर रहा है और लोग अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। करीब 15 वर्षों तक सत्ता में रहने वाली ममता बनर्जी सरकार अब बड़े राजनीतिक संकट से गुजर रही है। आने वाले दिनों में नई सरकार के गठन, शपथ ग्रहण और राजनीतिक समीकरणों पर पूरे देश की नजर बनी रहेगी।

