नई दिल्ली। देशभर में गर्मी ने इस साल अपने पुराने रिकॉर्ड तोड़ने शुरू कर दिए हैं। मई 2026 के मध्य में ही उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक गर्मी पड़ने की संभावना जताते हुए कई राज्यों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ती तपिश ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें सुनसान नजर आने लगी हैं, जबकि अस्पतालों में गर्मी से बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और बिहार के कई इलाकों में तेज लू चल रही है। राजधानी दिल्ली में तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया, वहीं राजस्थान के कुछ जिलों में पारा 48 डिग्री के करीब दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश के कई शहरों में भी भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं। भोपाल, ग्वालियर, रायसेन और विदिशा समेत कई जिलों में दोपहर के समय गर्म हवाओं ने लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण हर साल गर्मी की तीव्रता बढ़ती जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार जून माह में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। इससे बिजली और पानी की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है। कई राज्यों में बिजली कटौती और पानी की कमी की शिकायतें सामने आने लगी हैं।
भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर मजदूर वर्ग, किसान, बुजुर्ग और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूरों को तेज धूप में काम करना कठिन हो गया है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
सरकार और प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि कुछ स्थानों पर प्राथमिक कक्षाओं की छुट्टियां भी घोषित कर दी गई हैं। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह-जगह पानी के टैंकर और प्याऊ की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने लोगों को अधिक मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप में निकलते समय सिर ढकने की सलाह दी है।
गर्मी के कारण कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ने लगा है। खेतों में काम करने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के लिए भी यह मौसम कठिन साबित हो रहा है। कई गांवों में तालाब और जल स्रोत सूखने लगे हैं जिससे पानी का संकट गहराने लगा है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने की संभावना कम बताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण और जल बचाव के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल देशभर के लोग आसमान से बरसती आग और लू के थपेड़ों से राहत मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
मई 2026 के मध्य में ही उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और अधिक गर्मी पड़ने की संभावना जताते हुए कई राज्यों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। लगातार बढ़ती तपिश ने लोगों का जनजीवन प्रभावित कर दिया है। दोपहर के समय सड़कें सुनसान नजर आने लगी हैं, जबकि अस्पतालों में गर्मी से बीमार पड़ने वाले मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
भारतीय मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और बिहार के कई इलाकों में तेज लू चल रही है। राजधानी दिल्ली में तापमान 46 डिग्री तक पहुंच गया, वहीं राजस्थान के कुछ जिलों में पारा 48 डिग्री के करीब दर्ज किया गया। मध्य प्रदेश के कई शहरों में भी भीषण गर्मी से लोग परेशान हैं। भोपाल, ग्वालियर, रायसेन और विदिशा समेत कई जिलों में दोपहर के समय गर्म हवाओं ने लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते प्रदूषण के कारण हर साल गर्मी की तीव्रता बढ़ती जा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार जून माह में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने की संभावना है। इससे बिजली और पानी की मांग भी तेजी से बढ़ सकती है। कई राज्यों में बिजली कटौती और पानी की कमी की शिकायतें सामने आने लगी हैं।
भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर मजदूर वर्ग, किसान, बुजुर्ग और छोटे बच्चों पर पड़ रहा है। खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूरों को तेज धूप में काम करना कठिन हो गया है। डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और चक्कर आने के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है।
सरकार और प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि कुछ स्थानों पर प्राथमिक कक्षाओं की छुट्टियां भी घोषित कर दी गई हैं। नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जगह-जगह पानी के टैंकर और प्याऊ की व्यवस्था की जा रही है। प्रशासन ने लोगों को अधिक मात्रा में पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और धूप में निकलते समय सिर ढकने की सलाह दी है।
गर्मी के कारण कृषि क्षेत्र पर भी असर पड़ने लगा है। खेतों में काम करने वाले किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं के लिए भी यह मौसम कठिन साबित हो रहा है। कई गांवों में तालाब और जल स्रोत सूखने लगे हैं जिससे पानी का संकट गहराने लगा है।
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक राहत मिलने की संभावना कम बताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण और जल बचाव के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल देशभर के लोग आसमान से बरसती आग और लू के थपेड़ों से राहत मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

