पेरिस, 15 जून 2026। फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित दुनिया की सबसे बड़ी रक्षा और सुरक्षा प्रदर्शनी यूरोसैटरी (Eurosatory) 2026 में भारत ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते हुए वैश्विक रक्षा बाजार को स्पष्ट संदेश दिया है कि अब भारत केवल रक्षा उपकरणों का खरीदार नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ रक्षा निर्माता और निर्यातक देश भी बन चुका है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में भारतीय कंपनियों, रक्षा अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स ने अत्याधुनिक स्वदेशी तकनीकों का प्रदर्शन कर दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यूरोसैटरी 2026 का आयोजन 15 से 19 जून तक पेरिस के नॉर्ड विलेपिंटे प्रदर्शनी केंद्र में किया जा रहा है। इस प्रदर्शनी में 61 से अधिक देशों के लगभग 2,000 से ज्यादा प्रदर्शक और हजारों रक्षा विशेषज्ञ, सैन्य अधिकारी तथा नीति निर्माता शामिल हो रहे हैं। यह आयोजन रक्षा क्षेत्र में नई तकनीकों, हथियार प्रणालियों, संचार उपकरणों, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और आधुनिक युद्धक समाधानों के प्रदर्शन का सबसे बड़ा वैश्विक मंच माना जाता है। इस बार भारतीय मंडप (India Pavilion) विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। भारत की सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कई प्रमुख रक्षा कंपनियां अपनी नवीनतम तकनीकों और उत्पादों के साथ प्रदर्शनी में शामिल हुई हैं। भारतीय कंपनियों ने स्वदेशी ड्रोन, निगरानी प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, मिसाइल तकनीक, रक्षा संचार उपकरण और आधुनिक सैन्य समाधान प्रस्तुत किए हैं। इन उत्पादों ने विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और संभावित खरीदारों का विशेष ध्यान आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की बढ़ती उपस्थिति देश के रक्षा क्षेत्र में आए बड़े बदलाव का संकेत है। एक समय था जब भारत दुनिया के सबसे बड़े रक्षा आयातकों में गिना जाता था, लेकिन अब “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी पहल के कारण देश तेजी से रक्षा उत्पादन और निर्यात की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यूरोसैटरी 2026 में भारत की भागीदारी इसी परिवर्तन की मजबूत झलक प्रस्तुत करती है।
भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) भी इस प्रदर्शनी में अपनी महत्वपूर्ण तकनीकों का प्रदर्शन कर रहा है। स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और उन्नत तकनीकी समाधानों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित कर भारत ने यह दिखाया है कि वह आधुनिक युद्ध की चुनौतियों का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। DRDO के स्टॉल पर विदेशी प्रतिनिधियों की विशेष रुचि देखने को मिल रही है।
भारत की इस मजबूत उपस्थिति का एक बड़ा उद्देश्य वैश्विक रक्षा कंपनियों के साथ सहयोग बढ़ाना और रक्षा निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना भी है। प्रदर्शनी के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल विभिन्न देशों के रक्षा अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों के साथ व्यापारिक एवं तकनीकी साझेदारी पर चर्चा कर रहा है। इससे भारतीय रक्षा उद्योग को नए बाजार मिलने की संभावना बढ़ गई है। भारत और फ्रांस के बीच हाल ही में रक्षा, तकनीक और औद्योगिक सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी है। ऐसे समय में यूरोसैटरी 2026 में भारत की सक्रिय भागीदारी दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान कर सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शनी भविष्य में कई महत्वपूर्ण रक्षा समझौतों और संयुक्त परियोजनाओं का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्य में ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और स्वायत्त हथियार प्रणालियां तेजी से महत्वपूर्ण होती जा रही हैं। यूरोसैटरी 2026 में भी इन तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है। भारत ने इन क्षेत्रों में अपनी बढ़ती क्षमता का प्रदर्शन कर यह संकेत दिया है कि वह भविष्य की युद्ध तकनीकों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यूरोसैटरी 2026 में भारत की भागीदारी केवल एक प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की बढ़ती सामरिक शक्ति, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक रक्षा बाजार में बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है। भारतीय कंपनियों द्वारा प्रदर्शित स्वदेशी तकनीकों ने यह साबित कर दिया है कि भारत अब रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में विश्व के प्रमुख देशों की कतार में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
निष्कर्ष:यूरोसैटरी 2026 में भारत का दमदार प्रदर्शन देश की रक्षा क्षमता, तकनीकी प्रगति और आत्मनिर्भरता का सशक्त प्रमाण है। भारतीय रक्षा उद्योग ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि आने वाले वर्षों में भारत न केवल अपनी सुरक्षा जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में एक विश्वसनीय साझेदार और प्रमुख निर्यातक के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत करेगा।

