न्यूज़ सोर्स हेल्प डेस्क
राजस्थान की अरावली की पहाड़ियों के बीच बसे एक प्राचीन किले के बारे में वर्षों से तरह-तरह की कहानियाँ सुनाई जाती थीं। कहा जाता था कि सूरज ढलने के बाद वहाँ सन्नाटा इतना गहरा हो जाता है कि हवा की आवाज़ भी किसी फुसफुसाहट जैसी लगती है। स्थानीय लोग शाम होने से पहले उस क्षेत्र को छोड़ देते थे और रात में वहाँ जाने से साफ मना करते थे।
दिल्ली के पाँच दोस्तों—आरव, निखिल, सीमा, रिया और करण—को रोमांचक यात्राओं का बहुत शौक था। वे अपने यूट्यूब चैनल के लिए रहस्यमयी स्थानों की वीडियो बनाते थे। एक दिन उन्होंने तय किया कि इस पुराने किले में रात के समय जाकर उसकी सच्चाई दुनिया के सामने लाएँगे।
स्थानीय गाँव पहुँचने पर एक बुज़ुर्ग ने उन्हें चेतावनी दी, “बेटा, दिन में जितना घूमना है घूम लो, लेकिन सूरज डूबने के बाद उस किले में मत जाना। कई लोग गए, पर लौटकर कभी पहले जैसे नहीं रहे।”
दोस्तों ने इसे अंधविश्वास समझा और हँसते हुए अपनी तैयारी शुरू कर दी। उनके पास हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरे, ड्रोन, टॉर्च और रिकॉर्डिंग उपकरण थे।
शाम होते-होते वे किले के विशाल दरवाज़े तक पहुँच गए। टूटी हुई दीवारें, बिखरे हुए पत्थर और हवा में उड़ती धूल पूरे वातावरण को डरावना बना रहे थे। जैसे ही सूरज पहाड़ियों के पीछे छिपा, पूरे इलाके में एक अजीब-सा सन्नाटा छा गया।
उन्होंने कैमरे चालू किए और अंदर बढ़ने लगे।
पहले एक घंटे तक सब सामान्य रहा। तभी निखिल के कैमरे में अचानक एक सफेद धुंध जैसी आकृति दिखाई दी। उसने तुरंत पीछे मुड़कर देखा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उसने सोचा शायद कैमरे की तकनीकी खराबी होगी।
कुछ देर बाद सीमा को ऐसा लगा जैसे किसी ने उसके कान के पास धीरे से उसका नाम पुकारा हो।
“सीमा…”
वह घबरा गई। उसने चारों ओर देखा, लेकिन बाकी सभी उससे काफी दूर थे।
रात लगभग 11 बजे अचानक उनकी सभी घड़ियाँ एक ही समय पर रुक गईं—11:11।
मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह गायब हो गया।
उसी समय किले के पुराने मंदिर की दिशा से घंटियों की आवाज़ आने लगी।
“क्या यहाँ कोई और भी है?” करण ने काँपती आवाज़ में पूछा।
कोई उत्तर नहीं मिला।
वे धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़े। मंदिर के अंदर एक पुरानी टूटी हुई मूर्ति थी। लेकिन उसके सामने ताज़े फूल रखे हुए थे।
“यह किसने रखे?” रिया ने पूछा।
सब एक-दूसरे का चेहरा देखने लगे।
अचानक पीछे से तेज़ कदमों की आवाज़ आई।
ठक… ठक… ठक…
सबने टॉर्च घुमाई।
कोई नहीं था।
जैसे ही उन्होंने वापस मुड़ना चाहा, मंदिर का भारी लकड़ी का दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया।
चारों ओर अंधेरा छा गया।
उनकी टॉर्च एक-एक करके बंद होने लगी।
सिर्फ एक हल्की नीली रोशनी मंदिर के कोने से आ रही थी।
वहाँ एक पुराना दर्पण रखा था।
रिया ने जैसे ही उसमें देखा, उसे अपने पीछे एक महिला की धुँधली परछाईं दिखाई दी। उसने तुरंत पीछे देखा—लेकिन वहाँ कोई नहीं था।
फिर उसने दोबारा दर्पण में देखा।
इस बार वह परछाईं बिल्कुल उसके पीछे खड़ी थी।
रिया चीख उठी।
सभी भागकर बाहर निकले।
बाहर आते ही उन्हें लगा कि पूरा किला बदल चुका है।
जहाँ टूटे हुए मकान थे, वहाँ अब रोशनी जल रही थी।
बाज़ार सजा हुआ था।
लोग पुराने राजस्थानी वस्त्रों में घूम रहे थे।
घोड़े दौड़ रहे थे।
ढोल बज रहे थे।
जैसे वे अचानक सैकड़ों वर्ष पीछे पहुँच गए हों।
आरव ने कैमरा उठाया।
रिकॉर्डिंग चालू थी।
लेकिन स्क्रीन पर सिर्फ काला अंधेरा दिखाई दे रहा था।
अचानक भीड़ में खड़ी एक छोटी बच्ची उनकी ओर देखने लगी।
उसकी आँखें पूरी तरह सफेद थीं।
उसने मुस्कुराते हुए हाथ हिलाया।
“चलो हमारे साथ…”
इतना कहते ही पूरा दृश्य गायब हो गया।
फिर वही टूटा हुआ किला।
लेकिन अब पाँचों दोस्त अलग-अलग दिशाओं में खड़े थे।
किसी को याद नहीं था कि वे वहाँ कैसे पहुँचे।
रात के दो बजे उन्हें एक लंबा गलियारा मिला।
दीवारों पर पुराने चित्र बने थे।
हर चित्र में पाँच लोगों का समूह दिखाई देता था।
पहले चित्र में चेहरों की जगह खाली थी।
दूसरे चित्र में हल्की आकृतियाँ उभर रही थीं।
आखिरी चित्र देखकर सबके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
उसमें उन्हीं पाँचों के चेहरे बने हुए थे।
और चित्र के नीचे लिखा था—
“जो रात पूरी होने तक यहाँ रुकेगा, वह हमेशा यहीं रहेगा।”
घबराकर वे बाहर की ओर भागे।
लेकिन हर रास्ता घूमकर फिर उसी जगह पहुँच जाता।
जैसे किला उन्हें बाहर निकलने ही नहीं देना चाहता हो।
करीब तीन बजे अचानक तेज़ आँधी चली।
हवा में किसी के रोने की आवाज़ गूँजने लगी।
सीमा बेहोश होकर गिर पड़ी।
बाकी चार उसे उठाकर मुख्य द्वार की ओर दौड़े।
तभी सामने एक लंबी काली परछाईं दिखाई दी।
उसकी आँखें लाल थीं।
चेहरा धुएँ से ढका हुआ।
वह बिना चले उनकी ओर बढ़ रही थी।
आरव ने हिम्मत करके टॉर्च की तेज़ रोशनी उस पर डाली।
कुछ क्षण के लिए वह गायब हो गई।
सभी पूरी ताकत से भागे।
जैसे ही पूर्व दिशा में सूरज की पहली किरण दिखाई दी, वे किले के बाहर पहुँच गए।
गाँव वाले पहले से वहाँ मौजूद थे।
बुज़ुर्ग ने पूछा, “तुम लोग ज़िंदा कैसे लौट आए?”
उन्होंने पूरी घटना सुनाई।
लेकिन जब कैमरे की रिकॉर्डिंग देखी गई, तो उसमें पूरी रात सिर्फ पाँचों दोस्त अंधेरे में डरे हुए इधर-उधर भागते दिखाई दे रहे थे।
न कोई परछाईं।
न कोई मंदिर।
न कोई बच्ची।
सबने राहत की साँस ली।
कुछ दिनों बाद आरव वीडियो एडिट कर रहा था।
आखिरी फ्रेम पर उसकी नज़र पड़ी।
वीडियो समाप्त होने से ठीक पहले एक सेकंड के लिए कैमरे में वही सफेद आँखों वाली बच्ची दिखाई दी।
वह मुस्कुरा रही थी।
धीरे से उसने कहा—
“तुम तो चले गए…
लेकिन मैं तुम्हारे साथ आ गई।”
उसी क्षण कंप्यूटर की स्क्रीन अपने-आप काली हो गई।
कमरे की सारी लाइटें बुझ गईं।
और पीछे से वही धीमी फुसफुसाहट सुनाई दी—
“अब अगली कहानी… तुम्हारी है।”
उस रात के बाद आरव का यूट्यूब चैनल हमेशा के लिए बंद हो गया।
लोग कहते हैं कि आज भी कभी-कभी उस चैनल की पुरानी वीडियो अपने-आप चलने लगती है।
और आखिरी फ्रेम में वही बच्ची दिखाई देती है…
मुस्कुराती हुई।

