आलोक अवस्थी उत्तर प्रदेश प्रभारी शब्द मेल समाचार
अबकी बरस तू जल्दी आ आना… के जयघोष से गूंजा बिल्हौर
सात दिन तक पूजा-अर्चना, आरती, जगराता और भंडारे के बाद निकली भव्य विसर्जन यात्राएं
उत्तर प्रदेश। कानपुर नगर।बिल्हौर में गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ गणेश उत्सव रविवार को बिल्हौर कस्बे में भक्ति और उल्लास के साथ विसर्जन की ओर बढ़ा। छह दिनों तक घरों और पूजा पंडालों में गणपति बप्पा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना, आरती, जगराता और भंडारे हुए। सातवें दिन सुबह से ही पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। आरती और पूजन के बाद जब गणपति बप्पा की विदाई का समय आया तो माहौल भावुक हो उठा। श्रद्धालुओं ने विघ्नहर्ता से परिवार और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की और नम आंखों से अगले वर्ष फिर आने का न्योता दिया।
अबीर-गुलाल से रंगा रास्ता, ढोल की थाप पर झूमे श्रद्धालु
बिल्हौर क्षेत्र में इस बार करीब 38 स्थानों पर गणेश प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। रविवार को बिल्हौर कस्बा और बीबीपुर में स्थापित प्रतिमाओं की विसर्जन यात्राएं निकाली गईं। ढोल-नगाड़ों की थाप और भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालु अबीर-गुलाल उड़ाते हुए चल रहे थे। युवा ढोल की थाप पर नृत्य कर रहे थे तो महिलाएं और बच्चे भी उत्साह के साथ शोभायात्रा में शामिल हुए। ‘गणपति बप्पा मोरया, अबकी बरस तू जल्दी आ’ के जयघोष से कस्बे का माहौल भक्तिमय हो गया। रास्ते में लोगों ने प्रतिमाओं के दर्शन कर आरती की और प्रसाद ग्रहण किया।
पांच प्रमुख स्थानों से निकलीं शोभायात्राएं
कस्बे में जवाहर नगर स्थित शीतला देवी मंदिर, नानेश्वर बाबा दरबार, सुभाष नगर, महाराणा प्रताप नगर, बड़ी बाजार और गोहलिया पुरवा में स्थापित गणेश प्रतिमाओं की शोभायात्राएं निकाली गईं। अलग-अलग स्थानों से निकली यात्राओं में श्रद्धालु गणपति की प्रतिमा के साथ चल रहे थे। धार्मिक जयकारों के बीच यात्रा आगे बढ़ती रही। वहीं बीबीपुर से निकली विसर्जन यात्रा ईशन नदी तक पहुंची। यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया।
विघ्नहर्ता की विदाई में दिखी आस्था और भावनाओं की झलक
हिंदू धार्मिक परंपरा में गणेश जी को प्रथम पूज्य और विघ्नहर्ता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश का पूजन करने की परंपरा है। गणेश उत्सव के दौरान प्रतिमा स्थापना के बाद नियमित पूजा, आरती और प्रसाद वितरण के माध्यम से श्रद्धालु सामूहिक रूप से उत्सव मनाते हैं। विसर्जन को भी इसी परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। भक्तों के लिए यह केवल प्रतिमा विसर्जन नहीं बल्कि अगले वर्ष गणपति के पुनः आगमन की कामना का अवसर होता है। इसी भाव के साथ श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ का जयघोष करते हुए विदाई देते नजर आए।
पंडाल बने सामूहिक उत्सव और मेल-जोल का केंद्र
गणेश उत्सव के दौरान स्थापित पूजा पंडालों ने धार्मिक आयोजन के साथ सामाजिक मेल-जोल का भी अवसर दिया। छह दिनों तक आरती, भजन, जगराता और भंडारे में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उत्सव में भाग लिया। इससे मोहल्लों और गांवों में सामूहिक सहभागिता का माहौल बना रहा। विसर्जन यात्रा में भी अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों की भागीदारी देखने को मिली। जगह-जगह श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत कर गणपति के दर्शन किए।
नौवें और 11वें दिन भी निकलेगी विसर्जन यात्रा
क्षेत्र में सभी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन रविवार को नहीं हुआ। कई स्थानों पर गणेश उत्सव अभी जारी है। इन स्थानों पर नौवें और 11वें दिन पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों के बाद विसर्जन यात्राएं निकाली जाएंगी। इसके साथ ही बिल्हौर क्षेत्र में इस वर्ष का गणेश उत्सव पूरी तरह संपन्न होगा। श्रद्धालुओं की जुबान पर विदाई के समय एक ही भाव रहा—गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ।

