गगनेश तिवारी ब्यूरो शब्द मेल समाचार बिल्हौर कानपुर नगर
बिल्हौर, कानपुर नगर। क्षेत्र के हजारों मक्का उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने और बिचौलियों के शोषण से बचाने के उद्देश्य से अरौल में सरकारी मक्का क्रय केंद्र खोले जाने की मांग तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी बिल्हौर ग्रामीण के मंडल महामंत्री आनंद कटियार ने 32-मिश्रिख लोकसभा क्षेत्र के सांसद अशोक कुमार रावत को पत्र भेजकर किसानों की इस प्रमुख समस्या की ओर ध्यान आकर्षित कराया है।
अपने पत्र में आनंद कटियार ने कहा है कि बिल्हौर तहसील के अरौल कस्बे सहित आसपास के दर्जनों गांवों में बड़े पैमाने पर मक्के की खेती की जाती है। हर वर्ष हजारों क्विंटल मक्का उत्पादन होने के बावजूद क्षेत्र में एक भी सरकारी मक्का क्रय केंद्र न होने से किसानों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मजबूरी में किसानों को अपनी उपज लेकर दूर-दराज की मंडियों तक जाना पड़ता है, जिससे परिवहन खर्च बढ़ जाता है और समय की भी बर्बादी होती है।
बिचौलियों के हाथों शोषण झेल रहे किसान
क्षेत्रीय किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद व्यवस्था उपलब्ध न होने का फायदा स्थानीय व्यापारी और बिचौलिए उठा रहे हैं। किसान जब अपनी फसल बेचने के लिए बाजार पहुंचते हैं तो उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत पर मक्का बेचने के लिए विवश किया जाता है। कई बार किसानों को तत्काल भुगतान के लालच में अपनी मेहनत की फसल औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
किसानों का आरोप है कि एक ओर खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर उपज का उचित मूल्य न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है। यदि क्षेत्र में सरकारी खरीद केंद्र स्थापित हो जाए तो किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिल सकेगा और उनकी आय में भी वृद्धि होगी।
2400 रुपये MSP का मिल सकेगा लाभ
आनंद कटियार ने पत्र में उल्लेख किया है कि सरकार द्वारा मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2400 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है, लेकिन सरकारी खरीद केंद्र न होने के कारण अधिकांश किसान इस लाभ से वंचित रह जाते हैं। अरौल में मक्का क्रय केंद्र खुलने से किसानों को सीधे सरकारी दर पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा और उन्हें आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिलेगी।
गेहूं क्रय केंद्र को बनाया जाए मक्का क्रय केंद्र
पत्र में सुझाव दिया गया है कि अरौल में पूर्व से संचालित गेहूं क्रय केंद्र को ही मक्का क्रय केंद्र के रूप में संचालित किया जा सकता है। इससे सरकार को अतिरिक्त संसाधन खर्च नहीं करने पड़ेंगे और किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्या का समाधान भी हो जाएगा।
क्षेत्रीय किसानों में जगी उम्मीद
मक्का उत्पादक किसानों ने सांसद अशोक कुमार रावत से मांग की है कि वे इस विषय को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों से वार्ता कर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित कराएं। किसानों का कहना है कि यदि अरौल में सरकारी मक्का क्रय केंद्र स्थापित हो जाता है तो हजारों किसान सीधे लाभान्वित होंगे और क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
क्षेत्र के किसानों को अब सांसद एवं शासन-प्रशासन से सकारात्मक पहल की उम्मीद है, ताकि उनकी मेहनत की फसल का उचित मूल्य उन्हें मिल सके और बिचौलियों के शोषण से स्थायी रूप से मुक्ति मिल सके।

