देशभर में इस दिन को ‘समानता दिवस’ और ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है।
आज 14 अप्रैल, 2026 है और पूरा भारत भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती (अंबेडकर जयंती) बड़े उत्साह के साथ मना रहा है।1. राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने दी श्रद्धांजलि
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर में बाबासाहेब की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि “बाबासाहेब का संघर्ष और उनके विचार करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणापुंज हैं।”
‘समानता दिवस’ के रूप में आयोजन
देशभर में इस दिन को ‘समानता दिवस’ और ‘ज्ञान दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। दिल्ली, मुंबई (चैत्य भूमि) और नागपुर (दीक्षा भूमि) में लाखों की संख्या में अनुयायी बाबासाहेब को नमन करने जुटे हैं।
14 अप्रैल, 2026 को हम भारतीय संविधान के शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती मना रहे हैं। बाबासाहेब का जीवन ज्ञान, संघर्ष और समर्पण की एक अद्भुत मिसाल है। उन्होंने न केवल भारत का संविधान लिखा, बल्कि समाज के वंचित वर्गों, दलितों और महिलाओं के अधिकारों के लिए एक निर्णायक लड़ाई भी लड़ी।
उनका मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। वे मानते थे कि शिक्षा ही वह एकमात्र साधन है जिससे सामाजिक असमानता को मिटाया जा सकता है। आज ‘समानता दिवस’ के अवसर पर देश उनके ‘समतामूलक समाज’ के सपने को साकार करने का संकल्प ले रहा है। उनके विचार हमें सदैव न्यायपूर्ण और समावेशी राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देते रहेंगे।
उनका मूल मंत्र “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” आज भी उतना ही प्रासंगिक है। वे मानते थे कि शिक्षा ही वह एकमात्र साधन है जिससे सामाजिक असमानता को मिटाया जा सकता है। आज ‘समानता दिवस’ के अवसर पर देश उनके ‘समतामूलक समाज’ के सपने को साकार करने का संकल्प ले रहा है। उनके विचार हमें सदैव न्यायपूर्ण और समावेशी राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देते रहेंगे।
आज 14 अप्रैल, 2026 को पूरा देश और दुनिया भर में उनके अनुयायी बाबासाहेब की 135वीं जयंती का जश्न मना रहे हैं।
यह केवल एक जन्मदिन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के संकल्प का दिन है। आज के दिन की कुछ खास बातें:
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चैत्य भूमि और दीक्षा भूमि: मुंबई और नागपुर जैसे मुख्य केंद्रों पर आज लाखों लोग एकत्रित हुए हैं।
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संवैधानिक जागरूकता: स्कूलों और संस्थानों में भारतीय संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया जा रहा है ताकि उनके लोकतांत्रिक मूल्यों को याद किया जा सके।
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डिजिटल श्रद्धांजलि: लोग सोशल मीडिया के माध्यम से उनके अनमोल विचारों, जैसे “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”, को साझा कर रहे हैं।
प्रमुख कार्यक्रम
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चैत्य भूमि (मुंबई): दादर स्थित बाबासाहेब के स्मारक पर सुबह से ही जनसैलाब उमड़ा हुआ है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
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डिजिटल कैंपेन: सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है, जहाँ युवा उनके संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय के विचारों को साझा कर रहे हैं।
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सरकारी घोषणाएं: कई राज्य सरकारों ने आज के दिन वंचित वर्गों के लिए विशेष छात्रवृत्ति और नई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की है।

