स्वास्थ्य डेस्क | शब्द मेल न्यूज़
आज के समय में किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। पहले यह बीमारी मुख्य रूप से अधिक उम्र के लोगों में देखने को मिलती थी, लेकिन अब खराब खानपान, कम पानी पीने की आदत और बदलती जीवनशैली के कारण युवा और बच्चे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते इसका इलाज न कराया जाए तो यह किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है।
क्या होती है किडनी स्टोन?
किडनी स्टोन गुर्दे में बनने वाले कठोर खनिज और नमक के छोटे-छोटे क्रिस्टल होते हैं। जब मूत्र में कैल्शियम, ऑक्सालेट, यूरिक एसिड या अन्य खनिजों की मात्रा अधिक हो जाती है और पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तब ये कण आपस में मिलकर पथरी का रूप ले लेते हैं।
किडनी स्टोन बनने के प्रमुख कारण
- कम पानी पीना।
- अत्यधिक नमक और मसालेदार भोजन का सेवन।
- अधिक मात्रा में फास्ट फूड और जंक फूड खाना।
- बार-बार पेशाब रोकना।
- मोटापा और शारीरिक गतिविधि की कमी।
- मधुमेह और उच्च रक्तचाप।
- परिवार में पहले किसी को पथरी होना।
- अधिक ऑक्सालेट वाले खाद्य पदार्थों का अत्यधिक सेवन।
किडनी स्टोन के प्रमुख लक्षण
- कमर या पीठ के एक तरफ अचानक तेज दर्द।
- दर्द का पेट और जांघ तक फैलना।
- पेशाब में जलन।
- पेशाब में खून आना।
- बार-बार पेशाब लगना।
- मतली और उल्टी।
- बुखार और ठंड लगना (संक्रमण होने पर)।
- पेशाब का रुक-रुक कर आना।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि दर्द असहनीय हो, पेशाब बंद हो जाए, तेज बुखार आए या पेशाब में लगातार खून आए तो तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
किडनी स्टोन की जांच कैसे होती है?
डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार निम्न जांच कर सकते हैं—
- अल्ट्रासाउंड (USG)
- एक्स-रे KUB
- सीटी स्कैन (CT Scan)
- यूरिन टेस्ट
- ब्लड टेस्ट
इन जांचों से पथरी का आकार, स्थान और प्रकार का पता लगाया जाता है।
किडनी स्टोन का उपचार
1. दवाओं से उपचार
यदि पथरी का आकार लगभग 5 मिमी या उससे छोटा है, तो कई मामलों में पर्याप्त पानी, दर्द निवारक दवाओं और डॉक्टर द्वारा दी गई अन्य दवाओं की मदद से वह प्राकृतिक रूप से पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकती है।
2. ESWL (शॉक वेव थेरेपी)
इस तकनीक में शरीर के बाहर से शॉक वेव देकर पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है ताकि वह आसानी से बाहर निकल सके।
3. यूरेटरोस्कोपी (URS)
एक पतली दूरबीन जैसी नली के माध्यम से मूत्र मार्ग से पथरी तक पहुंचकर उसे लेजर से तोड़ा या निकाला जाता है।
4. पीसीएनएल (PCNL)
बड़ी पथरी होने पर पीठ में छोटा छेद बनाकर विशेष उपकरणों की सहायता से पथरी निकाली जाती है।
5. सर्जरी
आजकल खुली सर्जरी की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है। अधिकांश मामलों में आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीकों से इलाज संभव है।
क्या घरेलू उपाय कारगर हैं?
कुछ लोग नींबू पानी, नारियल पानी या पर्याप्त पानी पीने जैसे उपाय अपनाते हैं। ये शरीर में पानी की मात्रा बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, लेकिन बड़ी पथरी को केवल घरेलू उपायों से खत्म करने का कोई पक्का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के केवल घरेलू नुस्खों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
किडनी स्टोन से बचाव
- प्रतिदिन 2.5 से 3 लीटर (या डॉक्टर की सलाह के अनुसार) पर्याप्त पानी पिएं।
- नमक का सेवन कम करें।
- जंक फूड और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन से बचें।
- संतुलित आहार लें।
- नियमित व्यायाम करें।
- डॉक्टर की सलाह के बिना कैल्शियम या अन्य सप्लीमेंट अधिक मात्रा में न लें।
- पेशाब को लंबे समय तक न रोकें।
- यदि पहले पथरी हो चुकी है तो नियमित जांच कराते रहें।
किन लोगों में अधिक खतरा?
- 20 से 50 वर्ष की आयु के लोग।
- जिनके परिवार में पथरी का इतिहास हो।
- मधुमेह और मोटापे से ग्रस्त लोग।
- कम पानी पीने वाले व्यक्ति।
- अधिक गर्म क्षेत्रों में काम करने वाले लोग।
विशेषज्ञों की सलाह
यूरोलॉजिस्ट का कहना है कि किडनी स्टोन का समय पर इलाज कराने से अधिकांश मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। लंबे समय तक इलाज में देरी करने से संक्रमण, किडनी में सूजन या किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
निष्कर्ष
किडनी स्टोन एक सामान्य लेकिन दर्दनाक बीमारी है। सही समय पर जांच, उचित उपचार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इससे बचाव किया जा सकता है। यदि कमर में तेज दर्द, पेशाब में खून या पेशाब करने में परेशानी जैसी समस्या हो तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने या अप्रमाणित घरेलू उपचारों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना सबसे सुरक्षित विकल्प है। : न्यूज़ सोर्स हेल्प डेस्क
(स्वास्थ्य संबंधी यह जानकारी केवल जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी प्रकार की बीमारी या उपचार के लिए योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।)

