Madhya Pradesh सरकार की “मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना” आज प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार और कौशल विकास का बड़ा माध्यम बनती जा रही है। इस योजना का उद्देश्य युवाओं को प्रशिक्षण के साथ आर्थिक सहायता प्रदान करना है ताकि वे रोजगार के योग्य बन सकें और भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई यह योजना लगातार चर्चा में बनी हुई है और हजारों युवा इससे जुड़कर लाभ ले रहे हैं।
इस योजना के तहत 18 से 29 वर्ष तक के ऐसे युवा आवेदन कर सकते हैं जिन्होंने 12वीं, ITI, डिप्लोमा या स्नातक की पढ़ाई पूरी की हो। योजना के माध्यम से युवाओं को विभिन्न निजी और औद्योगिक संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को हर महीने स्टाइपेंड भी प्रदान किया जाता है जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
योजना के अनुसार ITI पास युवाओं को लगभग 8500 रुपये, डिप्लोमा धारकों को 9000 रुपये और ग्रेजुएट युवाओं को 10000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। इससे युवा प्रशिक्षण के साथ-साथ अपनी छोटी जरूरतों को भी पूरा कर पा रहे हैं। सरकार का कहना है कि योजना का मुख्य उद्देश्य केवल नौकरी देना नहीं बल्कि युवाओं को उद्योगों के अनुसार प्रशिक्षित करना है ताकि भविष्य में रोजगार के अवसर बढ़ सकें। हाल ही में विद्युत वितरण कंपनियों सहित कई विभागों और निजी संस्थानों में मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के अंतर्गत नई भर्तियां निकाली गई हैं। कई पदों पर कंप्यूटर ऑपरेटर, इलेक्ट्रिशियन, स्टेनोग्राफर, लाइनमैन और अकाउंट एग्जीक्यूटिव जैसे पद शामिल किए गए हैं। इन भर्तियों में बड़ी संख्या में युवाओं ने आवेदन किया है। योजना में आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन रखी गई है। उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना पंजीयन कर सकते हैं। आवेदन के लिए समग्र आईडी, मोबाइल नंबर और शैक्षणिक दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। पंजीयन के बाद उम्मीदवार अपनी योग्यता के अनुसार कोर्स और प्रशिक्षण संस्थान का चयन कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में केवल डिग्री होना पर्याप्त नहीं है बल्कि तकनीकी और व्यावहारिक कौशल भी जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे उद्योगों को प्रशिक्षित कर्मचारी मिल रहे हैं जबकि युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में भी इस योजना को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। कई युवा ऐसे हैं जो आर्थिक कमजोरी के कारण बड़े शहरों में प्रशिक्षण नहीं ले पाते थे, लेकिन अब उन्हें अपने ही जिले में प्रशिक्षण का अवसर मिल रहा है। इससे प्रदेश में कौशल विकास को नई गति मिली है।
राज्य सरकार का दावा है कि आने वाले समय में योजना के तहत और अधिक संस्थानों को जोड़ा जाएगा ताकि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को लाभ मिल सके। साथ ही नई तकनीकों और डिजिटल क्षेत्रों से जुड़े कोर्स भी शामिल किए जा रहे हैं। सरकार इसे प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी महत्वपूर्ण योजना मान रही है।
फिलहाल मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है और इसे रोजगार के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।

