नई दिल्ली। भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ वर्षों में आए राजनयिक उतार-चढ़ाव के बाद अब दोनों देशों के संबंधों में एक बार फिर आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को बढ़ाने की दिशा में गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। इसी क्रम में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 23 सितंबर 2026 को संकेत दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में कनाडा की यात्रा कर सकते हैं। यह संभावित यात्रा ऐसे समय में हो सकती है जब दोनों देश व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते यानी Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) पर बातचीत को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं।
कार्नी ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत और कनाडा के बीच व्यापार वार्ता में अच्छी प्रगति हो रही है और प्रधानमंत्री मोदी दिसंबर के आसपास कनाडा का दौरा कर सकते हैं। हालांकि यात्रा की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है। कनाडाई प्रधानमंत्री ने भारत के साथ संबंधों को व्यापार और अर्थव्यवस्था के अलावा लोगों के बीच संबंध तथा सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बताया।
व्यापार समझौते पर बढ़ी बातचीत की रफ्तार
प्रधानमंत्री मोदी की संभावित कनाडा यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि दोनों देशों के बीच चल रही CEPA वार्ता है। भारत और कनाडा व्यापक व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ा रहे हैं और दोनों पक्षों ने वर्ष 2026 के अंत तक वार्ता पूरी करने का लक्ष्य रखा है। कनाडा की ओर से भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में अच्छी प्रगति हो रही है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भी हाल में भारत-कनाडा व्यापार वार्ता को तेज करने की जानकारी दी है। चौथे दौर की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने अगले चरण की वार्ता आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। अगला दौर 5 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाला है। ऐसे में अक्टूबर से दिसंबर के बीच का समय व्यापार समझौते के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है CEPA?
CEPA यानी Comprehensive Economic Partnership Agreement एक व्यापक आर्थिक समझौता होता है, जिसमें केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित चर्चा नहीं होती, बल्कि सेवाओं, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े कई क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है।
भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित CEPA के तहत दोनों देशों के कारोबारी संबंधों को अधिक व्यवस्थित और विस्तारित करने पर बातचीत हो रही है। व्यापार बाधाओं को कम करना, बाजारों तक पहुंच बढ़ाना और निवेश के अवसरों को बढ़ावा देना इसके प्रमुख आर्थिक पहलुओं में शामिल हैं।
कनाडा की ओर से भारत के साथ व्यापार बढ़ाने को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जबकि भारत भी कनाडा के साथ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, तकनीक, शिक्षा और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम कर रहा है।
दिसंबर में क्यों महत्वपूर्ण हो सकती है मोदी की यात्रा?
प्रधानमंत्री मोदी की संभावित कनाडा यात्रा दिसंबर में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के आसपास हो सकती है। हालांकि यात्रा की तारीख और कार्यक्रम को लेकर अंतिम आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। कनाडाई प्रधानमंत्री कार्नी ने कहा है कि मोदी उस समय कनाडा आएंगे और उन्होंने उनके स्वागत की इच्छा व्यक्त की है।
ऐसे में यदि यात्रा होती है तो दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापार समझौते के अलावा ऊर्जा, तकनीक, निवेश, शिक्षा, सुरक्षा और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषयों पर चर्चा हो सकती है। जून 2026 में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी मोदी और कार्नी की मुलाकात हुई थी, जिसमें दोनों नेताओं ने भारत-कनाडा संबंधों में हुई प्रगति की समीक्षा की थी।
ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर भी नजर
भारत और कनाडा के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन रहा है। जून में मोदी और कार्नी की बैठक के दौरान LNG, LPG और metallurgical coal से जुड़े वाणिज्यिक सहयोग पर चर्चा हुई थी। दोनों देशों ने विश्वसनीय और मजबूत आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व पर भी जोर दिया था।
सितंबर में व्यापार वार्ता से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार कनाडा की LNG क्षमता और भारत की ऊर्जा जरूरतों के बीच संभावित सहयोग पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिजों से संबंधित सहयोग की संभावनाएं भी चर्चा में हैं।
महत्वपूर्ण खनिज और नई तकनीक
भारत के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षित आपूर्ति आने वाले वर्षों में एक महत्वपूर्ण आर्थिक और औद्योगिक मुद्दा है। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक्स और आधुनिक विनिर्माण सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण खनिजों की जरूरत बढ़ रही है।
कनाडा के पास कई महत्वपूर्ण खनिज संसाधन हैं और दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, नवाचार और तकनीकी क्षेत्र में साझेदारी भी भारत-कनाडा संबंधों के नए क्षेत्रों में शामिल है। मार्च 2026 में मोदी और कार्नी की बैठक में ऊर्जा, प्रतिभा, नवाचार और AI जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की गई थी।
भारत-कनाडा संबंधों में आया नया चरण
भारत और कनाडा के संबंधों में वर्ष 2023 के बाद तनाव देखने को मिला था। इसके बाद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों में भी कठिनाइयां आईं। अब प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के नेतृत्व वाली कनाडाई सरकार और भारत सरकार के बीच आर्थिक एवं रणनीतिक संबंधों को आगे बढ़ाने के प्रयास दिखाई दे रहे हैं।
मार्च 2026 में कार्नी की भारत यात्रा इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम रही। प्रधानमंत्री मोदी और कार्नी ने नई दिल्ली में मुलाकात के दौरान व्यापार और रक्षा संबंधों को मजबूत करने तथा CEPA वार्ता को तेज करने पर सहमति जताई थी। कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार दोनों देशों ने इस समझौते को 2026 में पूरा करने का लक्ष्य रखा था।
जून में दोनों नेताओं की G7 सम्मेलन के दौरान फिर मुलाकात हुई। उस समय दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मक गति और आर्थिक सहयोग में हुई प्रगति का उल्लेख किया। मोदी ने 2026 में कनाडा आने के निमंत्रण के लिए कार्नी को धन्यवाद दिया था और दोनों पक्षों ने सुविधाजनक तारीख तय करने के लिए राजनयिक माध्यमों से संपर्क जारी रखने पर सहमति जताई थी।
व्यापार के आंकड़े भी महत्वपूर्ण
भारत और कनाडा के बीच व्यापार पिछले वर्षों में कई क्षेत्रों में फैला हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 8 अरब डॉलर रहा। इस अवधि में भारत ने कनाडा को लगभग 4.67 अरब डॉलर का माल निर्यात किया, जबकि कनाडा से भारत का आयात लगभग 3.28 अरब डॉलर रहा।
भारत से कनाडा जाने वाले प्रमुख उत्पादों में दवाइयां, लौह एवं इस्पात, समुद्री उत्पाद तथा इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं शामिल हैं। वहीं कनाडा से भारत को दालों, कोयले, उर्वरकों और अन्य संसाधनों की आपूर्ति होती है। CEPA लागू होने की स्थिति में इन क्षेत्रों में व्यापार के स्वरूप और अवसरों में बदलाव आ सकता है, हालांकि अंतिम समझौते की शर्तें अभी बातचीत के अधीन हैं।
अगले 90 दिन रहेंगे महत्वपूर्ण
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कनाडा के साथ व्यापार वार्ता को तेज करने की बात कही है। चौथे दौर की बातचीत के बाद पांचवें दौर की वार्ता 5 अक्टूबर से शुरू होने की जानकारी दी गई है। दोनों देशों का लक्ष्य वर्ष के अंत तक समझौते की दिशा में आगे बढ़ना है।
इस कारण अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर के महीने भारत-कनाडा आर्थिक संबंधों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि किसी भी व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने से पहले बाजार पहुंच, शुल्क, सेवाओं, निवेश, नियमों और अन्य क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्षों की सहमति जरूरी होगी।
आगे क्या होगा?
प्रधानमंत्री मोदी की दिसंबर में संभावित कनाडा यात्रा को लेकर अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यात्रा की संभावना की पुष्टि कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने की है, लेकिन अंतिम तारीख और विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। इसी प्रकार भारत-कनाडा CEPA वार्ता जारी है और दोनों सरकारें इसे 2026 में पूरा करने के लक्ष्य पर काम कर रही हैं।
यदि वार्ता में महत्वपूर्ण प्रगति होती है तो दिसंबर में प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक भारत और कनाडा के बीच व्यापार एवं आर्थिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर बन सकती है। वहीं ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, AI, शिक्षा, निवेश और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के मुद्दे भी दोनों देशों के व्यापक संबंधों का हिस्सा बने रह सकते हैं।
कुल मिलाकर, सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में भारत-कनाडा संबंधों में व्यापार वार्ता की गति बढ़ी है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में संभावित कनाडा यात्रा ने इस प्रक्रिया को और अधिक चर्चा में ला दिया है। आने वाले अक्टूबर-दिसंबर के दौरान होने वाली वार्ताओं और दोनों सरकारों के निर्णयों से यह स्पष्ट होगा कि प्रस्तावित CEPA किस रूप में आगे बढ़ता है।

