न्यूज़ सोर्स हेल्प डेस्क
कानपुर/नई दिल्ली, 28 जून। उत्तर प्रदेश के कानपुर स्थित चकेरी एयरपोर्ट पर एक गंभीर विमानन सुरक्षा हादसा सामने आया है। एक फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन (FTO) में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिला प्रशिक्षु पायलट विमान से उतरते समय उसके घूमते हुए प्रोपेलर की चपेट में आ गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के बाद एयरपोर्ट प्रशासन, प्रशिक्षण संस्था और नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) हरकत में आ गए हैं। डीजीसीए ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं तथा संबंधित प्रशिक्षक को तत्काल प्रभाव से प्रशिक्षण कार्य से अलग कर दिया गया है। साथ ही दुर्घटनाग्रस्त प्रशिक्षण विमान को भी जांच पूरी होने तक ग्राउंड कर दिया गया है।
कैसे हुआ हादसा?
जानकारी के अनुसार यह घटना शुक्रवार रात प्रशिक्षण उड़ान पूरी होने के बाद हुई। प्रशिक्षु महिला पायलट अपने फ्लाइट इंस्ट्रक्टर के साथ ट्विन-इंजन ट्रेनर विमान से प्रशिक्षण उड़ान पूरी कर चकेरी एयरपोर्ट लौटी थी। विमान के रनवे पर उतरने के बाद इंजन और प्रोपेलर पूरी तरह बंद नहीं किए गए थे। इसी दौरान प्रशिक्षु पायलट को विमान से उतरने के लिए कहा गया।
जैसे ही वह विमान से नीचे उतरी और आगे बढ़ने लगी, उसका संतुलन बिगड़ गया और वह घूम रहे प्रोपेलर की चपेट में आ गई। प्रोपेलर उसकी पीठ और शरीर के निचले हिस्से से टकराया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। वहां मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार जारी है। चिकित्सकों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है, हालांकि चोटें गंभीर हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों में अपनाई जाने वाली सुरक्षा प्रक्रियाओं पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। विमानन विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी विमान से यात्रियों या प्रशिक्षुओं को तभी उतरने की अनुमति दी जाती है, जब इंजन पूरी तरह बंद हो जाएं और प्रोपेलर का घूमना रुक जाए। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि उड़ान प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन सामान्य व्यावसायिक उड़ानों से भी अधिक सख्ती से किया जाता है, क्योंकि प्रशिक्षु पायलट सीखने की प्रक्रिया में होते हैं और हर कदम पर प्रशिक्षक की जिम्मेदारी अधिक होती है।
डीजीसीए की सख्त कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने तत्काल जांच शुरू कर दी। प्रारंभिक जांच में सुरक्षा प्रक्रियाओं के पालन में संभावित लापरवाही की आशंका जताई गई है।
डीजीसीए ने जांच पूरी होने तक संबंधित फ्लाइट इंस्ट्रक्टर को प्रशिक्षण कार्य से हटा दिया है। इसके साथ ही जिस प्रशिक्षण विमान में दुर्घटना हुई, उसे भी उड़ान भरने से रोक दिया गया है। जांच टीम यह पता लगाएगी कि विमान का इंजन और प्रोपेलर चलते रहने के बावजूद प्रशिक्षु को नीचे उतरने की अनुमति क्यों दी गई तथा क्या मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन किया गया था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया?
घटना के समय एयरपोर्ट परिसर में मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि हादसा कुछ ही सेकंड में हो गया। विमान के आसपास मौजूद स्टाफ ने तुरंत आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराई। घायल प्रशिक्षु को प्राथमिक उपचार देने के बाद अस्पताल भेजा गया। एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन स्थिति शीघ्र नियंत्रित कर ली गई।
प्रशिक्षण संस्था भी जांच के दायरे में
जिस फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन में यह प्रशिक्षण चल रहा था, उसके सुरक्षा प्रोटोकॉल की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों ने प्रशिक्षण रिकॉर्ड, इंस्ट्रक्टर की ड्यूटी, विमान की तकनीकी स्थिति तथा सीसीटीवी फुटेज को जांच के दायरे में शामिल किया है।
यदि जांच में लापरवाही सिद्ध होती है, तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
विमानन विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का कहना है कि घूमता हुआ विमान का प्रोपेलर अत्यंत खतरनाक होता है। इसकी गति इतनी अधिक होती है कि कई बार वह स्पष्ट दिखाई भी नहीं देता। इसलिए विमान के आसपास आने-जाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य होता है।
उनका मानना है कि यह हादसा भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण सीख है और देश के सभी फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों को अपने सुरक्षा मानकों की पुनः समीक्षा करनी चाहिए।
नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए चेतावनी
भारत में पायलट प्रशिक्षण की मांग लगातार बढ़ रही है। इसके साथ ही फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों की संख्या भी बढ़ी है। ऐसे में सुरक्षा मानकों का कठोर अनुपालन और नियमित निरीक्षण पहले से अधिक आवश्यक हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की घटनाएं न केवल प्रशिक्षुओं की सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि देश की विमानन प्रशिक्षण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव डाल सकती हैं।
निष्कर्ष
कानपुर चकेरी एयरपोर्ट पर हुआ यह हादसा विमानन सुरक्षा के महत्व को एक बार फिर सामने लाता है। प्रशिक्षु महिला पायलट का उपचार जारी है और डीजीसीए की जांच से यह स्पष्ट होगा कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई तथा जिम्मेदारी किसकी थी। यदि जांच में सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित पक्षों पर कड़ी कार्रवाई की संभावना है।
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से सबक लेते हुए देशभर के फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थानों में सुरक्षा प्रक्रियाओं को और मजबूत किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। प्रशिक्षुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी स्तर पर लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।

