न्यूज़ सोर्स हेल्प डेस्क
नई दिल्ली, 28 जून। भारत ने पाकिस्तान के कराची में हुए आतंकी हमले को लेकर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें “निराधार, बेबुनियाद और तथ्यों से परे” बताया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा विफलताओं और आतंकवाद के बढ़ते खतरे पर ध्यान देना चाहिए, न कि हर घटना के लिए भारत को दोषी ठहराने की पुरानी आदत दोहरानी चाहिए।
हाल ही में पाकिस्तान के कराची शहर में स्थित सिंध रेंजर्स के एक सैन्य परिसर पर हुए बम विस्फोट और हथियारबंद हमले में कई सुरक्षा कर्मियों की मौत और कई अन्य घायल हो गए। पाकिस्तान की सेना ने बिना कोई सार्वजनिक और सत्यापित साक्ष्य प्रस्तुत किए इस हमले के पीछे भारत समर्थित तत्वों का हाथ होने का आरोप लगाया। भारत ने इन आरोपों को पूरी तरह अस्वीकार करते हुए कहा कि पाकिस्तान अपनी घरेलू समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए भारत के विरुद्ध झूठा प्रचार कर रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधि का समर्थन नहीं करता। भारत स्वयं दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है और आतंकवाद के विरुद्ध उसकी नीति पूरी तरह स्पष्ट तथा “शून्य सहिष्णुता” पर आधारित है। ऐसे में पाकिस्तान द्वारा लगाए गए आरोप न केवल तथ्यहीन हैं बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गुमराह करने का प्रयास भी हैं।
कराची में क्या हुआ?
पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में सिंध रेंजर्स के एक परिसर पर विस्फोटकों से लदे वाहन के साथ हमला किया गया। विस्फोट के बाद भारी गोलीबारी हुई। पाकिस्तान के अनुसार इस हमले में तीन रेंजर्स जवानों की मृत्यु हुई तथा कई अन्य घायल हुए। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई में कई हमलावरों को मार गिराया जबकि एक संदिग्ध को जीवित पकड़ने का दावा किया गया। प्रतिबंधित आतंकी संगठन जमात-उल-अहरार, जिसे पाकिस्तान तालिबान से जुड़ा गुट माना जाता है, ने इस हमले की जिम्मेदारी ली।
इसके बावजूद पाकिस्तान की सैन्य नेतृत्व ने बिना सार्वजनिक प्रमाण प्रस्तुत किए भारत पर आरोप लगाए। भारत ने इसे “जिम्मेदारी से बचने का प्रयास” बताया।
भारत की दो टूक प्रतिक्रिया
भारत ने कहा कि पाकिस्तान को यह समझना होगा कि उसके भीतर सक्रिय आतंकी संगठनों के कारण उसकी सुरक्षा व्यवस्था लगातार चुनौती का सामना कर रही है। भारत ने इस्लामाबाद को सलाह दी कि वह अपनी ऊर्जा आतंकवाद के ढांचे को समाप्त करने में लगाए, न कि पड़ोसी देशों पर आरोप लगाने में। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान को “अपने भीतर झांकना” चाहिए और आतंकवाद के खिलाफ विश्वसनीय कार्रवाई करनी चाहिए।
पाकिस्तान में बढ़ती आतंकी घटनाएं
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष रूप से बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और सिंध क्षेत्रों में सुरक्षा बलों पर लगातार हमले हो रहे हैं। पाकिस्तान सरकार स्वयं स्वीकार कर चुकी है कि विभिन्न उग्रवादी संगठन उसके लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। ऐसे हालात में भारत पर आरोप लगाना समस्या का समाधान नहीं माना जा सकता।
भारत का आतंकवाद पर स्पष्ट रुख
भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सहित विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के विरुद्ध कठोर वैश्विक कार्रवाई की मांग करता रहा है। भारत का कहना है कि आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता और आतंकवादियों तथा उन्हें संरक्षण देने वाले तंत्र के खिलाफ समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए।
भारत ने एक बार फिर दोहराया कि वह क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और विकास का समर्थक है, लेकिन अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार के झूठे आरोप स्वीकार नहीं करेगा।
अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान को अपने देश में सक्रिय चरमपंथी संगठनों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है। बिना ठोस साक्ष्य किसी अन्य देश पर आरोप लगाने से न केवल कूटनीतिक तनाव बढ़ता है बल्कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग भी प्रभावित होता है। कराची हमला यह भी दर्शाता है कि पाकिस्तान के भीतर आतंकी नेटवर्क अब भी सक्रिय हैं और वे सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।
निष्कर्ष
कराची हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर कूटनीतिक बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह निराधार आरोपों को पूरी तरह खारिज करता है और पाकिस्तान से अपेक्षा करता है कि वह अपनी आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का समाधान स्वयं खोजे। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता तभी संभव है जब आतंकवाद के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के ठोस और विश्वसनीय कार्रवाई की जाए तथा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्य और सहयोग को प्राथमिकता दी जाए.

