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धर्म

मां कंकाली की रहस्यमई मूर्ति जो स्वयं बदलती अपना स्वरूप

Shabdmail News
Last updated: April 10, 2026 2:14 am
Shabdmail News
Published: April 10, 2026
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स्वयं बदलती हैं रूप मां कंकाली की इस मूर्ति में है जान:

भोपाल के निकट स्थित कंकाली देवी मंदिर (गुदावल, रायसेन) अपनी पौराणिक कथाओं और रहस्यों के लिए प्रसिद्ध है। इसे “कंकाल मंदिर” इसलिए कहा जाता है क्योंकि माँ काली यहाँ अपने प्रचंड रूप में विराजमान हैं।
यहाँ के “असली सच” और रहस्यों से जुड़ी मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. झुकी हुई गर्दन का रहस्य
इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण माँ काली की प्रतिमा है, जिसकी गर्दन 45 डिग्री तक एक तरफ झुकी हुई है। स्थानीय मान्यताओं और भक्तों के अनुसार, साल में एक बार (विशेषकर दशहरे या नवरात्रि के दौरान) माता की यह झुकी हुई गर्दन अपने आप कुछ पलों के लिए सीधी हो जाती है। कहा जाता है कि जो भक्त इस दृश्य को देख लेता है, उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
2. मंदिर की उत्पत्ति (खुदाई में प्राप्ति)
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर लगभग 300-400 साल पुराना है।
स्वप्न दर्शन: कहा जाता है कि लगभग 1731 के आसपास, एक स्थानीय निवासी (हरलाल पटेल) को माता ने सपने में दर्शन दिए और जमीन के नीचे दबे होने की बात कही।
खुदाई: जब उस स्थान पर खुदाई की गई, तो यह भव्य प्रतिमा निकली। तब से यहाँ एक छोटा मंदिर बनाया गया, जो अब काफी विशाल रूप ले चुका है।
3. “कंकाली” नाम का आधार
रायपुर (छत्तीसगढ़) और भोपाल के आसपास कई “कंकाली” मंदिर हैं। इनका नाम “कंकाली” इसलिए पड़ा क्योंकि यहाँ प्राचीन काल में नागा साधु और तांत्रिक पूजा किया करते थे। कुछ स्थानों पर यह मंदिर श्मशानों के पास होते थे जहाँ साधु कंकालों के बीच साधना करते थे, जिससे माता का नाम कंकाली प्रसिद्ध हुआ।
4. चमत्कारी मान्यताएं
संतान प्राप्ति: यहाँ एक अनोखी परंपरा है। जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं मिल पाता, वे मंदिर की दीवार पर गोबर से उल्टे हाथ के निशान बनाती हैं। मनोकामना पूरी होने पर वे दोबारा आकर सीधा हाथ लगाती हैं और माता का आभार व्यक्त करती हैं।
20 भुजाओं वाली प्रतिमा: मंदिर में माता की 20 भुजाओं वाली भव्य प्रतिमा है। साथ ही यहाँ ब्रह्मा, विष्णु और महेश की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।
5. वैज्ञानिक और तार्किक दृष्टिकोण
विज्ञान के नजरिए से गर्दन का सीधा होना एक भौतिक पहेली हो सकता है, लेकिन अभी तक किसी ठोस वैज्ञानिक शोध ने इसकी पुष्टि नहीं की है। भक्तों के लिए यह पूरी तरह से आस्था और चमत्कार का विषय है।
कैसे पहुँचें?
यह मंदिर भोपाल से लगभग 40-45 किलोमीटर दूर रायसेन जिले के गुदावल गांव में स्थित है। यदि आप भोपाल में हैं, तो आप सड़क मार्ग से आसानी से यहाँ पहुँच सकते हैं। दशहरे के समय यहाँ भारी मेला लगता है।

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