आलोक अवस्थी उत्तर प्रदेश प्रभारी : शब्द मेल समाचार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के सबसे महंगे एक्सप्रेस-वे की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 4,700 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे पर उद्घाटन के महज 18 दिनों के भीतर 84 स्थानों पर सड़क धंसने और क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आई हैं। मामले के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।
84 स्थानों पर पैचवर्क, जांच के आदेश
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर 39 और कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन पर 45 स्थानों पर मरम्मत (पैचवर्क) की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड को एनएचएआई द्वारा ‘नॉन-परफॉर्मर’ घोषित किया गया है। कंपनी के तीन अधिकारियों को हटाते हुए तकनीकी जांच की जिम्मेदारी आईआईटी खड़गपुर की विशेषज्ञ टीम को सौंपी गई है।
निर्माण में अनियमितता के आरोप
विशेषज्ञों के अनुसार सड़क की नींव तैयार करने में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि मिट्टी की परतों को तय तकनीकी प्रक्रिया के अनुसार नहीं बिछाया गया, जिसके कारण कई स्थानों पर सड़क धंसने और दरारें आने की स्थिति बनी।
दुर्घटना ने बढ़ाई चिंता
30 जुलाई को धंसे हुए हिस्से पर गिट्टी से लदा एक ट्रक पलट गया, जिससे वाहन मालिक को लगभग 1.5 लाख रुपये के नुकसान का दावा किया गया। स्थानीय मजदूरों ने भी निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल का आरोप लगाया है।
75 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर की लागत
63 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर लगभग 4,700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं, यानी प्रति किलोमीटर करीब 75 करोड़ रुपये की लागत आई। इसके बावजूद कई स्थानों पर सड़क पर उभार, झटके और 1 से 3 इंच तक की दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है, जिससे तेज रफ्तार में वाहन चलाना जोखिमपूर्ण बताया जा रहा है।
कंपनी पर पहले भी लगे थे आरोप
निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड का नाम पहले भी कथित अनियमितताओं और सीबीआई जांच से जुड़े मामलों में सामने आ चुका है। अक्टूबर 2024 में कंपनी और उसकी कुछ सहायक इकाइयों पर नए टेंडरों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे बाद में हटा लिया गया। इन मामलों में आरोपों पर अंतिम न्यायिक निर्णय अलग विषय है।

