गगनेश तिवारी ब्यूरो: शब्द मेल समाचार बिल्हौर कानपुर नगर
बिल्हौर। अरौल थाना क्षेत्र के नानामऊ-बकोठी से कोठी रोड (वाया संजती-बादशाहपुर) स्थित संजती गंगा घाट और यहां का सैकड़ों वर्ष पुराना प्राचीन शिव मंदिर गंगा कटान की जद में आ गया है। मंदिर अब नदी के बिल्कुल किनारे पहुंच चुका है। लगातार हो रहे कटान से ग्रामीणों में भय का माहौल है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं कराए गए तो मंदिर कभी भी गंगा में समा सकता है।
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्षों से घाट के पक्कीकरण और मंदिर की सुरक्षा की मांग उठाई जा रही है। कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराने के बावजूद अब तक धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दी है। बरसात के मौसम में कटान तेज होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
उधर अधिकारियों का कहना है कि संजती गंगा घाट के पक्कीकरण का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। बजट उपलब्ध होते ही नानामऊ और आँकिन घाट की तर्ज पर इसका भी निर्माण कराया जाएगा।
इस बीच ग्रामीणों ने मांग की है कि गंगा कटान रोकने के लिए तत्काल सुरक्षा कार्य शुरू कराया जाए तथा प्राचीन शिव मंदिर को सुरक्षित करने के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। उनका कहना है कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है।
जनप्रतिनिधियों के आश्वासन
● विधायक का दौरा: करीब दो वर्ष पूर्व बिल्हौर विधायक मोहित सोनकर उर्फ राहुल बच्चा ने संजती घाट का निरीक्षण कर घाट के पक्कीकरण और प्राचीन शिव मंदिर की सुरक्षा का आश्वासन दिया था।
● सांसद का भरोसा: पिछले वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर आँकिन गंगा आरती कार्यक्रम के दौरान सांसद अशोक कुमार रावत ने भी संजती घाट के निर्माण और मंदिर संरक्षण के लिए सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिलाया था।
● डीएम का आश्वासन: 17 जनवरी को मकनपुर मेले के उद्घाटन अवसर पर जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने भी संजती घाट के पक्कीकरण का आश्वासन दिया था।
● अब भी इंतजार: ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से लगातार आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन आज तक न तो घाट का पक्कीकरण शुरू हुआ और न ही गंगा कटान से मंदिर को बचाने के लिए कोई स्थायी सुरक्षा कार्य कराया गया।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
– संजती गंगा घाट का शीघ्र पक्कीकरण कराया जाए।
– गंगा कटान रोकने के लिए तत्काल सुरक्षा कार्य शुरू हों।
– प्राचीन शिव मंदिर को सुरक्षित करने अथवा आवश्यकता पड़ने पर विधि-विधान के साथ सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
– धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को बचाने के लिए विशेष योजना बनाकर शीघ्र अमल किया जाए।

