जितेन्द्र सिंह जीतू आगरा मंडल प्रभारी शब्द मेल समाचार
आमतौर पर लोग अपनी समस्याएं लेकर अधिकारियों के दरवाजे पहुंचते हैं, जहां फाइलें और सरकारी प्रक्रियाएं हावी रहती हैं। लेकिन मैनपुरी में एक बेसहारा किशोर की कहानी ने जिलाधिकारी डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी की संवेदनशीलता और मानवीय कार्यशैली की एक अनूठी नजीर पेश की है।पेट की गंभीर बीमारी से पीड़ित एक किशोर मदद की उम्मीद में जिलाधिकारी के पास पहुंचा। उसने बताया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और वह एक महंत के आश्रम में रहकर जीवन गुजार रहा है। बीमारी के इलाज के लिए उसे समय-समय पर एक विशेष इंजेक्शन लगना अनिवार्य था, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वह दवा हासिल करने में असमर्थ था। किशोर की पीड़ा सुनते ही डीएम डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी ने तुरंत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को निर्देश जारी कर इंजेक्शन की व्यवस्था कराई।
मदद की यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। लगभग दो घंटे बाद वही किशोर दोबारा जिलाधिकारी के सामने खड़ा था। इस बार चुनौती कुछ और थी। उसने बताया कि इंजेक्शन को खराब होने से बचाने के लिए रेफ्रिजरेटर में रखना बेहद जरूरी है, लेकिन आश्रम में फ्रिज नहीं है। किशोर ने बताया कि उसे करीब ₹4,500 में एक पुराना (सेकंड हैंड) फ्रिज मिल रहा है, पर उसके पास इतने पैसे नहीं हैं।
किशोर की बेबस आंखें और जरूरत देखकर डीएम ने किसी भी सरकारी फंड या प्रक्रिया का इंतजार नहीं किया। उन्होंने तुरंत अपनी जेब से ₹4,500 निकालकर किशोर को सौंप दिए और कहा, “जाओ, पहले फ्रिज खरीदो और अपना इलाज जारी रखो।” इसके साथ ही उन्होंने किशोर को भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी किसी मदद की जरूरत हो, तो वह बिना झिझक उनके पास आ सकता है।

