घटना के 10 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली, पीड़ित परिवार सदमे में; सवाल—आखिर बाकी आरोपितों की गिरफ्तारी कब?
विवेक मिश्रा | शब्द मेल समाचार | बिल्हौर
बिल्हौर। ककवन थाना क्षेत्र में बाइक सवार युवक को बोलेरो से टक्कर मारने के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर पीड़ित पक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। घटना को करीब 10 दिन बीत चुके हैं। मुकदमे में पांच लोगों को नामजद किया गया था, लेकिन अब तक पुलिस केवल एक आरोपित को गिरफ्तार कर सकी है। चार नामजद आरोपित अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर बताए जा रहे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि गंभीर घटना के बावजूद आरोपितों की गिरफ्तारी में हो रही देरी से उन्हें न्याय को लेकर चिंता सताने लगी है।
ओवरटेकिंग के विवाद के बाद बढ़ा मामला
ककवन थाना क्षेत्र के मनावां गांव निवासी श्रवण कुमार 16 अगस्त को अपने साथी गौरव मिश्रा के साथ बाइक से चोकर लेने ककवन आया था। कस्बे के चौराहे पर लोडर को ओवरटेक करने को लेकर उसका लोडर चालक ओमप्रकाश से विवाद हो गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विवाद के दौरान गाली-गलौज और अभद्रता की गई तथा धमकी भी दी गई।
कुरौली मोड़ पर बोलेरो से टक्कर
विवाद के बाद श्रवण चोकर लेकर गांव लौट गया। कुछ देर बाद वह अपने साथी गौरव को लेने दोबारा ककवन की ओर बाइक से जा रहा था। आरोप है कि कुरौली मोड़ के पास सामने से आई बोलेरो ने उसकी बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में श्रवण गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद बोलेरो सवार मौके से फरार हो गए। राहगीरों की मदद से घायल को अस्पताल पहुंचाया गया।
पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा
श्रवण के पिता की तहरीर पर पुलिस ने बोलेरो चालक करहल, मैनपुरी निवासी प्रशांत कुमार सिंह, रसूलाबाद क्षेत्र के पलिया गांव निवासी ओमप्रकाश, उसके बेटे सत्यम व सोनू तथा रिश्तेदार उत्तम के खिलाफ हत्या के प्रयास की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
दस दिन में सिर्फ एक गिरफ्तारी
पुलिस ने मंगलवार को ओमप्रकाश को पांडव नदी पुल के पास से गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि अन्य आरोपितों की तलाश में दबिश दी जा रही है। हालांकि पीड़ित पक्ष का सवाल है कि घटना के करीब 10 दिन बाद भी चार नामजद आरोपित पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं।
पीड़ित परिवार बोला—सदमे में हैं, कब मिलेगा न्याय?
पीड़ित परिवार का कहना है कि घटना के बाद से वे मानसिक तनाव और सदमे में हैं। परिवार को सबसे अधिक चिंता फरार आरोपितों को लेकर है। पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाया कि जब मुकदमे में पांच लोगों को नामजद किया गया है तो एक की गिरफ्तारी के बाद बाकी चार आरोपितों तक पुलिस कब पहुंचेगी?
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि पुलिस के पास आरोपितों के खिलाफ पर्याप्त जानकारी है तो उनकी गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हो रही है। परिवार ने पुलिस अधिकारियों से मामले की गंभीरता को देखते हुए फरार आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि “एक गिरफ्तारी से न्याय पूरा नहीं होता। जब तक बाकी नामजद आरोपित गिरफ्तार नहीं होते, परिवार की चिंता खत्म नहीं होगी।”
अब पुलिस के सामने चार आरोपितों की गिरफ्तारी की चुनौती
एक आरोपित की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस के सामने बाकी चार नामजद आरोपितों को पकड़ने की चुनौती है। थाना प्रभारी जितेंद्र राजपूत के अनुसार फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
अब सवाल यही है कि घटना के 10 दिन बाद भी फरार चल रहे चार नामजद आरोपितों की गिरफ्तारी आखिर कब होगी? पीड़ित परिवार की निगाहें पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।


