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पर्यावरण दिवसः प्लेटफॉर्म की छतों से मिलेगी प्राकृतिक रोशनी
बारादेवी से नौबस्ता तक एलिवेटेड सेक्शन के नीचे 1200 वर्ग मीटर के ग्रीन बेल्ट के साथ वर्षा जल संरक्षण के भी किए गए हैं इंतजाम
जीरो कार्बन एमिशन प्रणाली वाली मेट्रो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पेश कर रही मिसाल
उत्तर प्रदेश।कानपुर। मेट्रो ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए काॅरिडोर-1 के अंतर्गत शेष सेक्शन (कानपुर सेंट्रल – नौबस्ता) में तैयार हो रहे स्टेशनों में नवीकरणीय एवं अक्षय ऊर्जा के प्रावधान सुनिश्चित किए हैं। बारादेवी से नौबस्ता तक 5 एलिवेटेड स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया गया है, जिससे सौर ऊर्जा का अधिकतम उपयोग किया जा सके। इसके लिए इन सभी एलिवेटेड स्टेशनों के प्लेटफॉर्म की छत के निर्माण में प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग (पीईबी) स्ट्रक्चर का उपयोग किया गया है। सौंदर्य की दृष्टि से उपयुक्त होने के साथ-साथ, इस स्ट्रक्चर की एक अन्य विशेषता यह भी है कि यह मध्य में किसी पिलर के बिना ही बड़े क्षेत्र को कवर करने में सक्षम है।
अक्षय ऊर्जा से बचत की राह
पीईबी संरचना की डिजाइन लागत-प्रभावी होने के साथ-साथ पर्यावरण के अनुकूल भी है। इनमें ट्रांसलूसेंट (पारदर्शी) शीट के उपयोग से प्लेटफॉर्म पर सूर्य की प्राकतिक रोशनी दिनभर बनी रहती है। कृत्रिम रोशनी का कम से कम उपयोग होने से बिजली की बचत होती है।
इसके अलावा, स्टेशनों के कॉनकोर्स लेवल अथवा प्रथम तल को भी अधिक से अधिक खुला और हवादार बनाया गया है। स्टेशन परिसर के निर्माण में खिड़कियों और जालियों का भरपूर उपयोग किया गया है। इन प्रावधानों से ऊर्जा की बचत के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में भी कमी लाने में मदद मिलेगी।
ग्रीन बेल्ट और वर्षा जल संरक्षण
कॉरिडोर-1 (आईआईटी से नौबस्ता) के अंतर्गत वर्तमान में संचालित आईआईटी से कानपुर सेंट्रल तक मीडियन पर विकसित ग्रीन बेल्ट की तर्ज पर, बारादेवी-नौबस्ता एलिवेटेड सेक्शन के नीचे लगभग 1200 वर्ग मीटर क्षेत्र में भी हरियाली विकसित की गई है। इससे सड़क की सुंदरता बढ़ने के साथ-साथ वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल रही है। कानपुर मेट्रो द्वारा अब तक गुरुदेव चौराहा स्थित मेट्रो डिपो और समग्र कॉरिडोर के मीडियन को मिलाकर कुल 35,000 वर्ग मीटर हरित क्षेत्र (ग्रीन कवर) विकसित किया जा चुका है। इसके अलावा, बारादेवी – नौबस्ता एलिवेटेड सेक्शन पर वर्षा जल संरक्षण के लिए विशेष प्रबंध भी किए गए हैं, जिसमें वायाडक्ट (पुल) के ड्रेनेज सिस्टम से पानी को नीचे मीडियन में लगाए गए पौधों तक पहुंचाने की व्यवस्था है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उत्तर प्रदेश मेट्रो द्वारा अपनाए गए प्रमुख नवाचार एवं प्रयास
मेट्रो ट्रेनों एवं लिफ्टों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग तकनीक का उपयोग। इससे ब्रेकिंग के दौरान उत्पन्न ऊर्जा को पुनः उपयोग में लाया जाता है।
उत्तर प्रदेश मेट्रो ट्रेनें कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर आधारित एचव्हीएसी नियंत्रण प्रणाली से लैस हैं। इस तकनीक से 12 से 16 प्रतिशत तक ऊर्जा की बचत होती है।
कानपुर मेट्रो डिपो में 1 मेगावाट क्षमता का सोलर रूफटॉप प्लांट स्थापित किया गया है।
काॅरिडोर-1 में मीडियन एवं डिपो सहित लगभग 35,000 वर्ग मीटर ग्रीन कवर का विकास।
कानपुर मेट्रो डिपो में जीरो डिस्चार्ज सिस्टम, जिससे अपशिष्ट जल का पूर्ण पुनर्चक्रण सुनिश्चित होता है।
परिचालन स्तर पर भी ऊर्जा बचत के लिए कई उपाय किए गए हैं, जैसे- परियोजना चरण से ही सभी स्टेशनों पर एलईडी लाइट्स की व्यवस्था; सभी लिफ्ट, एस्केलेटर, एएचयू एवं चिलर्स में वेरिएबल वोल्टेज वेरिएबल फ्रीक्वेंसी ड्राइव का प्रयोग; एस्केलेटर में क्रॉलिंग/स्लीप मोड एवं कम गति संचालन का प्रावधान; सभी लोड प्वाइंट्स की ऊर्जा निगरानी व्यवस्था; बीएमएस (बिल्डिंग मैनेजमेंट सिस्टम) एवं टाइमर से नियंत्रित लाइटिंग सिस्टम।
कानपुर मेट्रो द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों को देखते हुए इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी) ने सभी संचालित मेट्रो स्टेशनों को प्लेटिनम रेटिंग प्रदान की है।
उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने कहा कि, ‘‘मेट्रो अन्य सार्वजनिक परिवहन साधनों की तुलना में पर्यावरण की सबसे अच्छी मित्र है क्योंकि यह जीरो कार्बन एमिशन के साथ संचालित होती है। कानपुर मेट्रो ने आरंभ से ही पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए कई नवाचार किए हैं। बारादेवी से नौबस्ता तक नवनिर्मित पांचों एलिवेटेड स्टेशन डिजाइन, सौंदर्य, पर्यावरण और लागत- चारों दृष्टि से ही अत्यंत अनुकूल हैं। वर्ष 2025 में ऊर्जा संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए आईआईटी कानपुर मेट्रो स्टेशन को माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गरिमामयी उपस्थिति में सर्टिफिकेट ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया

