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उत्तर प्रदेश। कानपुर नगर यूआईएसईएमएच के प्रसूति एवं स्त्री रोग (OBGYN) विभाग की ओर से ऑस्टियोपोरोसिस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से BMD (बोन मिनरल डेंसिटी) जांच शिविर एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिविर में करीब 150 लोगों की जांच की गई, जबकि 120 प्रतिभागियों के विस्तृत BMD आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम कारकों, बचाव, हड्डियों के स्वास्थ्य और समय पर जांच के महत्व के बारे में जानकारी दी। ऑर्थोपेडिक विभाग के डॉ. प्रग्नेश ने हड्डियों की मजबूती से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। वहीं OBGYN विभाग की डॉ. प्रतिमा वर्मा और डॉ. मीनाक्षी शर्मा ने महिलाओं में ऑस्टियोपोरोसिस के जोखिम और उससे बचाव के उपाय बताए।
जांच के आंकड़ों के अनुसार 120 प्रतिभागियों में 38 यानी 31.7 प्रतिशत की BMD सामान्य पाई गई। वहीं 75 यानी 62.5 प्रतिशत प्रतिभागियों में ऑस्टियोपीनिया और सात यानी 5.8 प्रतिशत में ऑस्टियोपोरोसिस पाया गया। 40 से 49 वर्ष आयु वर्ग के प्रतिभागियों की संख्या सर्वाधिक 40 रही। पूरे समूह का औसत T-score लगभग -1.19 रहा।
विशेषज्ञों ने बताया कि ऑस्टियोपीनिया में हड्डियों की मजबूती सामान्य से कुछ कम हो जाती है, जबकि ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियां काफी कमजोर और भुरभुरी हो सकती हैं, जिससे फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है। बढ़ती उम्र, रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव, परिवार में ऑस्टियोपोरोसिस या फ्रैक्चर का इतिहास, कम वजन, कैल्शियम व विटामिन-D की कमी, शारीरिक निष्क्रियता, धूम्रपान, अधिक शराब का सेवन और लंबे समय तक स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल जोखिम बढ़ा सकता है।
कार्यक्रम में भारत से संबंधित उपलब्ध शोध आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस और ऑस्टियोपीनिया की व्यापकता अलग-अलग आबादी और परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती है। ऐसे में समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह महत्वपूर्ण है।
लोगों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार, पर्याप्त कैल्शियम व प्रोटीन, उचित विटामिन-D स्तर तथा नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाने की सलाह दी गई। बुजुर्गों में गिरने से बचाव और मांसपेशियों को मजबूत करने वाली गतिविधियों पर भी विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम डॉ. सीमा द्विवेदी, विभागाध्यक्ष, के निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में आयोजित हुआ। इसके समन्वय में डॉ. फरहीन सिद्दीकी और डॉ. प्रीति सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में डॉ. नीना गुप्ता, डॉ. शैली अग्रवाल, डॉ. पाविका लाल, डॉ. दिव्या द्विवेदी, डॉ. सीमा निगम समेत विभाग के संकाय सदस्य, सिस्टर, जूनियर रेजिडेंट और कर्मचारी मौजूद रहे।

